जगदलपुर। इस साल मानसून सीजन में अपेक्षाकृत कम बारिश के बावजूद बस्तर संभाग के सिंचाई जलाशयों में रबी सीजन की फसल सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी है। किसानों की ओर से फसल की सिंचाई के लिए पानी की न्यूनतम मांग के कारण भंडारित जल का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। हर साल सौ मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक पानी व्यर्थ हो जाता है। यह स्थिति तब है जब बस्तर संभाग में सिंचाई का रकबा कृषि योग्य भूमि का केवल 12.15 फीसद है।

किसानों द्वारा फसल की सिंचाई के लिए पानी की मांग नहीं किए जाने पर संभागीय जल उपभोक्ता समिति ने चिंता जताई है। समिति ने किसानों से रबी फसल का रकबा बढ़ाने का आह्वान किया है ताकि जलाशयों में सिंचाई के लिए सुरक्षित पानी का अधिकाधिक उपयोग किया जा सके। बुधवार को संभागायुक्त कार्यालय में संभागीय जल उपभोक्ता समिति की बैठक हुई।

बैठक में संभागायुक्त जीआर चुरेंद्र, अधीक्षण यंत्री इंद्रावती परियोजना मंडल के साथ सातों जिलों कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता, उप संचालक कृषि, संयुक्त संचालक कृषि सहित उद्यानिकी विभाग के अधिकारी आदि मौजूद थे। बैठक में जीआर चुरेंद्र ने बस्तर संभाग के सभी क्षतिग्रस्त जलाशय, एनीकटए स्टाप डेम आदि मरम्मत हेतु 15 दिवस के भीतर संबंधित जिला पंचायत कार्यालयों में अनिवार्य रूप से प्राक्कलन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई की सुविधा प्रदान करने के लिए निर्मित इन जल स्रोतों की उपयोगिता सुनिश्चित करने के साथ ही पानी की अपव्यय को रोकने के लिए क्षतिग्रस्त अधोसंरचनाओं की तत्काल मरम्मत आवश्यक है। किसानों को खरीफ और रबी की फसल के साथ साग सब्जी की खेती के लिए प्रोत्साहित करने जल संसाधन और कृषि विभाग के अधिकारियों को मिलकर संयुक्त रूप से कार्य करने कहा गया। संभागायुक्त ने अधिकारियों को पानी के महत्व को देखते हुए इसके संरक्षण और संवर्धन हेतु समुचित उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए उन्होंने किसानों को कम पानी की खपत वाले फसलों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करने तथा पानी की बर्बादी को रोकने के संबंध में समझाइश देने के निर्देश भी दिए गए।

अधिकारी दफ्तर से बाहर निकलकर काम करें

चुरेंद्र ने बस्तर संभाग के जिन जिलों से होकर इंद्रावती नदी गुजरती है उन जिलों में अनिवार्य रूप से उद्वहन सिंचाई योजना के लिए प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि अधिकारी दफ्तर से बाहर निकलकर किसानों के बीच जाएं। उन्हें प्रोत्साहित करें और विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करें तभी लक्ष्‌य की प्राप्ति संभव हो सकेगी।

चुरेंद्र ने अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर जल स्रोतों से अनावश्यक पानी के बहाव को रोकने के उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए उन्होंने श्रम आधारित व्यवस्था सुनिश्चित कर इस कार्य में जल संसाधन विभाग के साथ-साथ कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों की भी भागीदारी सुनिश्चित कराने को कहा। इस कार्य के अंतर्गत बोरी बंधान, मिट्टी बंधान आदि कार्यों को प्राथमिकता के साथ कराने के निर्देश भी दिए।

संभाग में 441 पूर्ण सिंचाई योजनाएं

बस्तर संभाग में इंद्रावती परियोजना मंडल के अंतर्गत संभाग का 93 फीसद क्षेत्र आता है। सात फीसद क्षेत्र (कांकेर जिले का) महानदी परियोजना में आता है। इंद्रावती परियोजना मंडल में 441 पूर्ण निर्मित सिंचाई योजनाएं हैं। इन योजनाओं से एक लाख 24 हजार 481 हेक्टेयर (खरीफ और रबी सीजन को मिलाकर) क्षेत्र में सिंचित क्षमता निर्मित है। इस साल नवंबर अंत की स्थिति में जलाशयों में इनकी सकल जल भंडारण क्षमता 144.73 मिलियन घटमीटर की तुलना में करीब 53 फीसद जल मौजूद है। बैठक में बताया गया कि इस साल खरीफ सीजन में सिंचाई लक्ष्‌य 50 फीसद ही प्राप्त किया जा सका है। रबी सीजन के लिए पानी की कोई कमी है पर पुराने अनुभवों के अनुसार यहां रबी सीजन में किसान लक्ष्‌य से काफी कम संख्या में पानी लेते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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