कोंडागांव Chhattisgarh News । इस वर्ष कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लोगों की पेशी अदालतों में नहीं हो पा रही है जिससे कई आरोपी दंड से बच गये हैं। एक मामला ऐसा भी हुआ जहां इंसान ही नहीं बल्कि देवी-देवताओं की अदालत भी नहीं लग पाई तथा देवी देवता भी एक वर्ष तक दंडित होने से बच गए।

केशकाल के भंगाराम देव मंदिर के पास एक ऐसा स्थान है जहां प्रतिवर्ष भादो माह के प्रथम शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को देवी-देवताओं की अदालत लगती है, जहां दोषी देवी देवताओं को कारागार या जेल की सजा होती है। चली आ रही मान्यता के अनुसार वर्ष में एक बार लगने वाले इस मेले में महिलाओं का आना वर्जित है।

इस आयोजन मे आसपास के कई गांव के देवी-देवताओं की उपस्थिति होती है किंतु इस वर्ष कोरोना वायरस के चलते देवी-देवताओं की परीक्षा एवं उनको दंडित करने की प्रक्रिया नहीं हो पाई। जात्रा से जुड़े लोगों ने जिला प्रशासन से अनुमति लेने के लिए कई बार दौड़ लगाई किंतु उन्हें अनुमति नहीं मिली। तत्पश्चात सामान्य पूजा पाठ करके कार्यक्रम समापन किया गया।

मेले में सैकड़ों लोग करते हैं शिरकत

इस जात्रा में केशकाल एवं आसपास के सैकड़ों लोग अपने अपने देवी-देवताओं के साथ उपस्थित होते हैं किंतु इस बार उड़िदगांव विश्रामपुरी से एक मात्र कुंवर पाठ आंगादेव को आमंत्रित किया गया था, जबकि प्रतिवर्ष आसपास के कई देवी-देवताओं एवं पुजारी को निमंत्रण भेजा जाता था किंतु इस बार कोरोनावायरस के संक्रमण के चलते निमंत्रण नहीं भेजा गया, जिससे कई लोगों को कार्यक्रम की जानकारी भी नहीं हो पायी है।

जात्रा में उपस्थित भंगाराम समिति के कोषाध्यक्ष बलराम गौर ने बताया कि वे एवं समिति के कुछ अन्य लोग कलेक्टर कोंडागांव से यात्रा की अनुमति लेने गए थे किंतु जात्रा के लिए अनुमति नहीं मिली। तत्पश्चात्र बहुत कम संख्या में कुछ प्रमुख लोगों के द्वारा सरकार के गाइडलाइन का पालन करते हुए पूजा पाठ का कार्यक्रम सम्पन्न कराया गया।

अब आगामी साल में होगा फैसला

ग्रामीणों की इच्छा थी कि किसी तरह जिला प्रशासन से अनुमति मिले तथा इस वर्ष भी दोषी देवी-देवताओं को दंड दिया जा सके किंतु जिला प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने से देवी देवता दंड से बच गए। अब यह आयोजन पूरे एक वर्ष बाद 2021 के भादो जात्रा में होगी तथा उस समय तक साल भर का जीवन दान देवी देवी देवी देवताओं को मिल चुका है अब उनका फैसला आने वाले वर्ष में ही हो पाएगा।

सौ साल में पहली बार नहीं लग पाई अदालत

केशकाल में विगत 100 वर्षों से भंगाराम देव की पूजा अर्चना भादो के महीने में शनिवार को होती आई है। मेले में सैकड़ों की संख्या में आंगा देव आया करते थे और एक आंगा के साथ गांव के लगभग 15 से 20 लोगों का दल पूरे साजो सामान, राशन के साथ पहुंचता था जहां दिनभर मेला चलने के बाद रात रुक कर दूसरे ही दिन विदाई होती थी। परंतु इस वर्ष कोरोना के कारण जिला प्रशासन और मंदिर समिति के लोगों ने भी केवल 9 परगना से कुल 45 लोग यानि एक परगना से 5 लोगों के अनुपात में अनुमति ली इसके अलावा समिति के 10 पदाधिकारियों को अनुमति दी गयी। बाकी भक्त अपनी श्रद्धा लेकर दर्शन को आते गए और जाते गए। मंदिर समिति के सदस्य बलराम गौर ने बताया कि आजादी के पहले से आ रही इस परंपरा को महामारी कोरोना संकट काल के चलते बदलना पड़ा जिसका कई श्रद्धालुओं को अफसोस भी है।

- शासन द्वारा फिजिकल डिस्टेंस का पूर्ण पालन करते हुए मंदिर परिसर के करीब प्रवेश द्वार पर्रआते ही सभी लोगों का हाथ सैनिटाइज किया गया। सभी को मास्क पहनना भी अनिवार्य किया है तथा मास्क का भी वितरण किया है। - राकेश साहू, तहसीलदार केशकाल

Posted By: Nai Dunia News Network

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