अनिल मिश्रा, जगदलपुर। नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में आदिवासियों का दिल जीतने के लिए सरकार अब आदिवासी देवी-देवताओं के पूजा स्थल देवगुड़ी की शरण में है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने जिले में 143 देवगुड़ियों को चिन्हित किया है, जहां बुनियादी सुविधाएं जुटाई जाएंगी। प्रत्येक देवगुड़ी को सजाने-संवारने, पेयजल, शौचालय, फेंसिंग, शेड आदि के निर्माण के लिए दंतेवाड़ा प्रशासन ने सात-सात लाख रुपये जारी किए हैं।

देवगुड़ी आदिवासियों के मंदिर हैं। आदिवासी संस्कृति में देवगुड़ी का बहुत महत्व है। हर गांव व समुदाय के अलग-अलग देवी-देवता होते हैं। ये मुख्य रूप से प्रकृति से जुड़े होते हैं। आदिवासी खास मौकों पर देवगुड़ी में जुटते हैं। पूजा, बलि आदि के बाद नाच-गान होता है। साल में एक बार देवगुड़ी में जात्रा का आयोजन किया जाता है। बस्तर दशहरा या दंतेवाड़ा के फागुन मड़ई जैसे उत्सवों में हर गांव से देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है।

आदिवासी परंपरा में देवगुड़ी के महत्व को देखते हुए दंतेवाड़ा प्रशासन ने इनके पुनरुद्धार की योजना शुरू की है। बस्तर में सर्व आदिवासी समाज पहले से ही इसकी मांग करता रहा है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के कार्यकाल में भी इस तरह की पहल की गई थी। पर अब इसे नक्सल समस्या से निपटने के औजार के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल प्रशासन का मानना है कि विकास कार्यों का विरोध करने वाले नक्सली इस योजना का विरोध करेंगे तो यह आदिवासियों के आस्था व विश्वास के विरुद्ध होगा। हालांकि नक्सली सरकार की किसी भी मदद के खिलाफ हैं।

दंतेवाड़ा एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने बताया कि कुछ मामलों में ग्रामीणों की यह शिकायत आई है कि देवगुड़ी के निर्माण में नक्सली अवरोध लगा रहे हैं। उन्होंने धमकी दी है कि अगर देवगुड़ी निर्माण के लिए गड्ढा खोदा तो उसी गड्ढे में इस काम में सहयोग करने वालों को दफना देंगे। हालांकि, यह आस्था का मामला है तो बड़ी अड़चन कहीं पर नहीं है। प्रशासन ने करीब 15 देवगुड़ी में काम भी पूरा कर लिया है।

हर देवगुड़ी के आसपास एक एकड़ जमीन भी चिन्हित की गई है। एसपी का कहना है कि शुरू में जब नक्सली बस्तर आए तो उन्होंने पुजारी, पटेल, गायता आदि समाज प्रमुखों को निशाना बनाया। अब देवगुड़ी में लोग जुटेंगे तो सामूहिक चर्चा होगी। प्रशासन व पुलिस की पहुंच भी देवगुड़ी के जरिए उन गांवों तक बनेगी।

कलेक्टर ने बनाई योजना

देवगुड़ी के पुनरुद्धार की योजना कलेक्टर दीपक सोनी ने तैयार की है। उन्होंने सरकार की प्रमुख योजनाओं को लागू करने का माध्यम देवगुड़ियों को माना है। देवगुड़ी का मामला है, लिहाजा कई नक्सल प्रभावित गांवों में भी इनका काम बिना रुकावट के हो चुका है। देवगुड़ी सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र के तौर पर विकसित किए जा रहे हैं। यहां मलेरिया उन्मूलन के लिए मच्छरदानी का प्रयोग, सुपोषण अभियान आदि के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक करने की योजना बनाई गई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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