जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बस्तर में इन दिनों देश ही नहीं विदेशों से भी पर्यटकों के आने का सिलसिला जारी है। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव मेें शामिल होने के साथ ही पर्यटक बस्तर की खूबसूरती का दृश्य देखने गांव और जंगल की ओर भी आ-जा रहे हैं। सात समुंदर पार के संयुक्त राज्य अमेरिका से इसी सप्ताह पांच मेहमान (पर्यटक) बस्तर भ्रमण पर आए थे। शुक्रवार को इनकी वापसी हुई।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान मध्य स्थित ग्राम मांझीपाल के रजनीशपुरम में इन्होंने पांच दिन होम स्टे कर बस्तर को बूझने का प्रयास किया। बस्तर की आदिवासी संस्कृति से ये काफी प्रभावित रहे। जूड़ी, जैफ, मिली और डिक ने नईदुनिया से चर्चा में कहा कि बस्तर के जंगल विश्व धरोहर श्रेणी के हैं। यहां की आदिम संस्कृति प्रेरक है। इन्हें संरक्षित और संवर्धित करने स्थानीय युवक ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।

अतिथियों ने बताया कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, विभिन्न वनौषाधियों तथा गांवों में जाकर धुरवा आदिवासियों की लोक संस्कृति का अध्ययन किया। मांझीपाल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से शिक्षा संदर्भित चर्चा कर उनके पारंपरिक लोकगीतों को सुना। विदेशी अतिथियों ने बस्तरिया व्यंजनों के स्वाद की जमकर सराहना की। अतिथियों का कहना था कि बस्तर के संदर्भ में जो बातें प्रचार माध्यमों में कही गई हैं। हमने यहां के अल्प प्रवास में इस भू भाग को उससे कहीं बेहतर पाया।

जंगल के प्रति समर्पित आदिवासी समाज पूरी दुनिया के लिए प्रेरक हैं। आज जब दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रही है, ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन करना और अपने जंगलों के प्रति गंभीर रहना यहां के निवासियों से सीखना चाहिए। सुविधा भोगी समाज के लोगों को ग्रामीण संस्कृति कई सीख देने में सक्षम है। तभी नई पीढ़ी के लिए धरती को हम बचा पाएंगे।

Posted By: Pramod Sahu

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