जगदलपुर। राज्य गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष डा महन्त रामसुन्दर दास ने पशुधन को मानव समाज के लिए महत्वपूर्ण संपदा और सहयोगी बताते हुए पशुधन के संरक्षण और संवर्धन तथा उनके सुरक्षा के पुख्ता उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने प्रत्येक चार माह के भीतर अनिवार्य रूप से जिला स्तरीय पशु क्रू रता निवारण समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए।

इस बैठक में राज्य गौ-सेवा आयोग ने बस्तर जिले में गौ अभ्यारण के लिए 50 एकड़ जमीन के अलावा जीव-जन्तु, मुक्तिधाम और जीव जंतु रुगनालय बनाने हेतु जमीन चिह्नांकित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि कसाई खाना के संचालनकर्ताओं के पास अनिवार्य रूप से लाइसेंस होना चाहिए। इसके अलावा पशुवध गृह में परदे की व्यवस्था होना भी आवश्यक है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को बच्चों को पशुधन की महत्ता की जानकारी प्रदान करने के निर्देश भी दिए। डा. रामसुन्दर दास ने पुलिस विभाग के अधिकारियों को पशु क्रुरता में संलिप्त वाहनों को राजसात करने की कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा मुर्गी को उल्टा लटका कर परिवहन करने वाले व्यापारियों के उपर भी दण्डात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

अधिकारियों को सख्त निर्देश

उन्होंने राजस्व, पुलिस तथा पशुधन वन विभाग के अलावा अन्य संबंधित विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि बस्तर जिले में हर हाल में पशु क्रुरता के रोकथाम के पुख्ता उपाय सुनिश्चित की जाए। कलेक्ट्रेट के प्रेरणाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय पशु क्रुरता निवारण समिति की बैठक में बस्तर जिले में पशु क्रुरता को रोकने तथा पशुओं के सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष, एमआर निषाद, अपर कलेक्टर अरविन्द एक्का, वन मण्डल अधिकारी स्टायलो मंडावी सहित जनप्रतिनिधि और अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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