जगदलपुर। कोरोना की बार के बाद अभी बाजार ठीक से उठा ही नहीं था, कि व्यापारियों पर कर का बोझ आने से व्यापारी वर्ग आक्रोशित है। केंद्र सरकार ने जीएसटी की दर पांच फीसदी से बढाकर बारह फीसदी करने का जो निर्णय लिया इसका बस्तर चैंबर आफ कामर्स ने विरोध किया है। व्यापारियों ने जीएसटी दर को घटाने और विदेशी ई कामर्स कंपनी के कृत्यों के उजागर होने के बाद

उनपर अपराध पंजीबद्ध करने की मांग की है। व्यापारियों ने इस मामले को लेकर विरोध जताया और रैली की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचकर संयुक्त कलेक्टर ठाकुर को ज्ञापन सौंपा। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के नाम सौंपे गए अलग अलग ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने कर में कमी और ई कामर्स कंपनियों पर देशद्रोह का केस लगाने की बात कही है।

बस्तर चेंबर अध्यक्ष किशोर पारख ने बताया कि पिछली जीएसटी काउंसिल की बैठक में कपड़े व जूतों पर जीएसटी की दर पांच से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया है। यह व्यापारियों के लिए अत्यधिक बोझ साबित होगा।कृषि के बाद कपड़ा व्यवसाय ही सबसे बढ़ता व्यवसाय है जिससे बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है। कोविड की मार से कपड़ा व जूता व्यवसायी उबरने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में टैक्स दर की वृद्धि व्यवसाय पर बुरा प्रभाव डालेगी। सरकार को चाहिए कि इस वृद्धि को तत्काल वापस लेकर राहत प्रदान करें।

कई देशद्रोही गतिविधियों में संलिप्त

ई-कामर्स कम्पनी के बारे बस्तर चेंबर का कहना है कि ये कंपनी कई देशद्रोही गतिविधियों में संलिप्त पाई गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने पुष्टि की है। कश्मीर में प्रतिबंधित विस्फोटक की आपूर्ति एमाजोन कंपनी के माध्यम से हुई थी। जिसमें बड़ी संख्या में हमारे जवान शहीद हुए थे।

कार्यशैली की जांच हो

इसी तरह मादक पदार्थ की भी आपूर्ति ऐसी कंपनियां कर रही हैं। इन्हीं राष्ट्र विरोधी कार्यों के कारण व्यापारी वर्ग यह मांग करता है कि ऐसी कंपनियों के कार्यशैली की जांच हो और जिनपर दोष पाया जाता है, उनपर देश द्रोह का मामला दर्ज किया जाएगा, बताया गया कि यह विरोध प्रदेश व्यापी है। आगे की रणनीति राष्ट्रीय संगठनों से प्राप्त दिशा निर्देशों अनुसार तय की जाएगी। विरोध प्रदर्शन में बस्तर चेंबर व जूनियर चेंबर के पदाधिकारी, कपड़े व जूतों के व्यापारियों सहित बड़ी संख्या में अन्य व्यापारी उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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