हेमंत कश्यप

जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद उनके राजमुकुट में लगा कोहिनूर हीरा फिर से चर्चा में है। इस नायाब हीरे का वारंगल से बस्तर आए काकतीय राजाओं से खास संबंध रहा है। बस्तर महाराजा कमलचंद भंजदेव राज का दावा है कि कोहिनूर कभी काकतीय राजपरिवार की संपत्ति रहा है। उसकी देवी मंदिर या राजकोष की चोरी हुई थी। उसे वापस भारत लाने वारंगल में दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं। राजमुकुट में लगे कोहिनूर हीरे को वापस भारत लाने की मांग फिर से उठने लगी है।

आंखें चौंधिया देने वाली अपनी चमक और अलौकिक बनावट के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध नायाब कोहिनूर हीरा अब ब्रिटेन राज परिवार के पास है। यह रत्न कई मौतों की वजह भी रहा है। इसका वारंगल से बस्तर आए काकतीय राजाओं से खास संबंध रहा है। दावा किया जाता है कि कोहिनूर हीरा तेलंगाना के गोलकुंडा खदान में मिला था। उन दिनों तेलंगाना का वारंगल राज्य चालुक्य काकतीय वंश के आधिपत्य रहा है।

यहां रुद्रदेव प्रथम ने इस्वी सन 1158 से 1195, महादेव ने 1195 से 1198, गणपतिदेव ने 1199 से 1261, रुद्रमा देवी ने 1262 से 1289, प्रतापरुद्रदेव या रुद्रदेव द्वितीय ने 1289 से 1323 तक राज किया। इस्वी सन 1303 में मुस्लिम शासक अलाउद्दीन खिलजी के गुलाम मलिक काफूर जिसे हजार दिनारी भी कहा जाता था ने वारंगल पहुंचकर रुद्रदेव द्वितीय को अपना राज्य खिलजी सल्तनत के अधीन करने की चेतावनी दी थी।

कमलचंद्र भंजदेव बताते हैं कि उस चेतावनी के बाद खिलजी से अंतिम युद्ध हुआ था। इस युद्ध के दौरान ही कोहिनूर हीरा की चोरी हो गई थी परंतु यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उस हीरे की चोरी काकतीयों के देवी मंदिर से चोरी हुई थी या वारंगल राजकोष से। तब हमारा कोहिनूर हीरा मुस्लिम शासकों के पास चला गया। बाद में ये ब्रिटिश सत्ता को सौंप दिया गया और इसे ब्रिटेन के राजमुकुट में जड़ा गया।

प्रताप रूद्रदेव बस्तर आ गए

इस घटना के बाद प्रताप रूद्रदेव अपने भाई अन्नामदेव और बहन रैला देवी के साथ वारंगल से पलायन कर बस्तर आ गए। भंजदेव ने दावा किया कि वारंगल से काकतीय राजवंश के राजा के बस्तर आने का उल्लेख वारंगल गजेटियर में है।

भंजदेव ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय रामचंद्र सिंहदेव ने भी दी थी। उन्होंने ही हमें कोहिनूर को वापस भारत लाने तथा दावा प्रस्तुत करने प्रेरित किया था। तभी से हम कोहिनूर से संदर्भित दस्तावेज लगातार सहेज रहे हैं। बहुत से कागजात मिल चुके हैं। वारंगल गजेटियर के अलावा अन्य सूत्रों से भी दस्तावे एकत्र किए जा रहे हैं। कागजात पूर्ण होते ही भारत सरकार के माध्यम से दावा प्रस्तुत किया जाएगा।

क्या है कोहिनूर की विशेषता

कोहिनूर हीरा को विश्व में सबसे खास रत्न का दर्जा प्राप्त है। यह 105.6 कैरेट का है और इसका वजन 21.6 ग्राम है। वर्तमान में इसकी अनुमानित कीमत लगभग 150 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। यह मूलत: भारत का है। यह तेलंगाना के गोलकुंडा हीरा खदान में पाया गया था। इसे प्राप्त करने के लिए बीते समय में कई रियासतों में होड़ मची रही।

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का 96 वर्ष की आयु में हाल ही निधन हुआ है। किवदंती है कि कोहिनूर किसी महिला के सिर सुशोभित होता है तो वह ताकतवर शासक बन जाती है, लेकिन इसे कोई पुरुष धारण करें तो उसका अस्तित्व ही नष्ट हो जाता है।

Posted By: Pramod Sahu

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