Bastar News जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ओडिशा से बस्तर के रास्ते अंतरराज्यीय गांजा तस्कर लंबे समय से गांजा की तस्करी करते रहे हैं। बस्तर पुलिस ओडिशा सीमावर्ती थानों में विशेष चौकसी बरतते हुए इन पर लगाम कस रही है। धनपुंजी, करपावंड, बकावंड तथा भानपुरी में स्थाई चेक प्वाइंट बनाए गए हैं। सूचनातंत्र मजबूत किया गया है। नतीजतन बीते दो साल में नारकोटिक्स के 145 मामलों में पुलिस ने 249 तस्करों से कुल 12 हजार 800 किलो गांजा जब्त किया है, जिसकी कीमत 6 करोड़ 25 लाख 30 हजार रुपये आंकी गई है।

ज्ञात हो कि ओडिशा के कोरापुट व मलकानगिरी जिलों में अवैध रूप से व्यापक पैमाने पर गांजे की खेती की जाती है। दुर्गम क्षेत्रों में पहाड़ियो के तराई में गांजा की फसल लगाई जाती है। इसकी तस्करी में नक्सलियों के संरक्षण की बात भी सामने आती रही है। ओडिशा से अंतरराज्यीय तस्कर बस्तर के रास्ते से महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, झारखंड,बिहार आदि राज्यों में खपाते रहे हैं। पुलिस से बचने के लिए तस्कर अंदरूनी रास्तों का इस्तेमाल करते रहे हैं।

इनसे निपटने के लिए एसएसपी ने सीमावर्ती थानों में सजगता के निर्देश दिए हैं। वहीं ओडिशा सीमा से लगे क्षेत्रों में चार जगह स्थाई चेक प्वाइंट बनाए गए हैं। यहां सीसीटीवी फुटेज भी लगाए गए हैं ताकि संदिग्ध वाहनों पर नजर रखी जा सके। इन कवायदों से पुलिस को सफलता मिल रही है। वर्ष 2020 से अब तक मादक पदार्थ तस्करी के 145 प्रकरण बनाये गए हैं। साथ ही 249 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा तस्करी के लिए इस्तेमाल किये गए 150 से भी अधिक गाड़ियां जब्त की गई हैं। जब्त वाहनों में अधिकतर लक्जरी वाहनें हैं।

गांजा रखने का सिरदर्द खत्म

पूर्व में पुलिस को जब्त मादक पदार्थ को थानों में सुरक्षित रखने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता था। मालखाने में जगह की कमी भी रहती थी। वहीं चूहे धमाचौकड़ी करते हुए गांजा के पैकेट कुतरकर यत्र-तत्र फैला देते थे और पूरा परिसर गांजे से महकता था। इस समस्या से निजात पाने के लिए पुलिस लाइन में रेंज स्तरीय सेंट्रल मालखाना बनाया गया है। इसमें संभाग भर के थानों में जब्त गांजों को रखा जाता है। साथ ही रेंज स्तरीय नष्टीकरण समिति द्वारा समय-समय पर न्यायालयीन अनुमति के बाद गांजा के नष्टीकरण की कार्रवाई की जाती है।

Posted By: Pramod Sahu

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