बीजापुर। Bijapur Naxal Area जिला मुख्यालय से 14 किमी दूर पदेड़ा के ग्रामीणों ने जिला पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों पर नक्सल ऑपरेशन के नाम पर मारपीट, फर्जी एनकाउंटर करने जैसे आरोप लगाए हैं। फोर्स की ज्यादती के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने कलेक्टर को आप-बीती सुनाते कार्रवाई की मांग की।

सरपंच गुड्डू कोरसा के साथ आए ग्रामीणों का कहना था कि सुरक्षा गश्त के नाम पर गांव में जब भी सीआरपीएफ, जिला बल के जवान आते हैं ग्रामीणों को घरों से निकालकर पूछताछ के नाम पर बर्बरता की जाती है। उन्हें लात घूसों और बंदूक के कुंदों से पीटा जाता है।

ग्रामीणों के मुताबिक अधिकतर ग्रामीणों को हिंदी नहीं आती। इसके चलते जवानों द्वारा किए जाने वाले सवाल उन्हें समझ नहीं आते और इसी चुप्पी को गलत नजरिए से देख जवानों का कहर उन पर टूटता है।

पीड़ित ग्रामीणों ने कलेक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा है जिसमें उल्लेख है कि वर्ष 2005 से सलवा जुडूम के बाद से वे लगातार पुलिस और अर्द्‌धसैन्य बल के जवानों द्वारा प्रताड़ित हैं। नक्सली संदेह में जवान उन पर बर्बरता करते हैं। नतीजतन कई ग्रामीण सुरक्षा बलों के भय से गांव छोड़कर सीमावर्ती राज्यों में पलायन कर गए हैं और वे अब गांव लौटना नहीं चाहते।

ज्ञापन में ग्रामीणों की तरफ से पलायन करने वाले ग्रामीणों के अलावा कुछ मृत ग्रामीणों के नाम भी शामिल हैं, जिनकी हत्या का आरोप जवानों पर लगाया गया है। इनमें हपका गुण्डा, हपका बुड़ता, कोरसा बुधरू, कोरसा कोवा, शंकर ताती, कोरसा लखमू, पुनेम गंगू, सुखराम कोरसा, लक्खू कोरसा, पण्डरू कोरसा के नाम हैं।

इसी तरह सोमलू मोड़ियम, कोरसा सोमा, लक्खू कोरसा, जोगा माड़वी, हपका सोनू, जिला कोरसा, लच्छू कोरसा के बारे में कहा गया है कि सुरक्षा बलों द्वारा इन्हें नक्सल मामलों में फंसाकर जेल भेजा गया है, जबकि चार अन्य ग्रामीणों में हपका दशरू, हपका बदरू, हपका सुक्कू और सोमा ताती सुरक्षा बलों के भय से पलायन कर गए हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network