अनिल मिश्रा। जगदलपुर, नईदुनिया

जंगल में मिलने वाले मशरूम की विभिन्ना प्रजातियों के लिए मशहूर बस्तर में अब प्रतिकूल तापमान पर कृत्रिम रूप से बटन मशरूम की खेती की तैयारी की जा रही है। दंतेवाड़ा कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानियों ने पहली बार बटन मशरूम का उत्पादन करने में सफलता हासिल की है। अब किसानों को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई जा रही है। जल्द ही दंतेवाड़ा में बटन मशरूम का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगा। कृषि विज्ञान केंद्र दंतेवाड़ा के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. नारायण साहू के मुताबिक बटन मशरूम में रोग प्रतिरोधी क्षमता होती है। कोरोना काल में यह बेहद उपयोगी हो सकता है। गौरतलब है कि बटन मशरूम का उत्पादन कम तापमान और उच्च आर्द्रता वाले इलाकों में किया जाता है। दंतेवाड़ा का तापमान इन दिनों 40 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर है। विषम जलवायु में इसका उत्पादन कर विज्ञानियों ने बड़ी सफलता हासिल की है और अब किसानों को इससे जोड़कर उनके आय को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। बटन मशरूम की एक फसल लेने में करीब 120 दिन का वक्त लगता है। इसके लिए बिजाई पूर्ण होने के बाद माइसीलयम की वृद्धि होने तक यानी करीब 14 दिन तक कक्ष का तापमान 20 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड तक रखना होता है। इसके बाद अगले एक महीने तक कक्ष का तापमान और कम होना चाहिए। अमूमन 14 से 18 डिग्री तापमान पर इसका उत्पादन होता है। कक्ष की आर्द्रता भी 80 फीसद से कम नहीं होनी चाहिए। बाजार में बटन मशरूम की बहुत मांग है। आयस्टर मशरूम की तुलना में यह एक हफ्ते तक ताजा बना रहता है।

यह है खेती की विधि

बटन मशरूम की खेती के लिए सबसे पहले गेंहू की भूसी से कम्पोस्ट बनाया जाता है। इसमें करीब एक महीने लगते हैं। कम्पोस्ट में 65 फीसद तक नमी व इसका पीएच मान शुद्ध जल से थोड़ा अधिक यानी 7.8 तक होना चाहिए। 12 से 18 सेमी के पालिथिन बैग में दो इंच कम्पोस्ट भरकर एक के ऊपर एक छह तह तक बिजाई करना चाहिए। दो फीसद फार्मिलीन के घोल से मशरूम कक्ष को निर्जीवीकृत कर मशरूम पिंडों को इस पर बिछाया जाता है। बिजाई के 12 से 15 दिन में माइसीलियम पिंड पर फैलने लगता है। इसके बाद कम्पोस्ट की परत से केसिंग (कम्पोस्ट की ऊपरी सतह को अलग करना जिससे मशरूम का ठीक से विकास हो पाए) करनी चाहिए।

कई बीमारियों में उपयोगी

बटन मशरूम रोग प्रतिरोधी तो है ही यह रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर आदि कई बीमारियों में भी काम आता है। बटन मशरूम में 19 से 35 फीसद तक प्रोटीन होता है। इसमें 8.8 फीसद तक वसा के साथ ही विटामिन बी काम्प्लेक्स, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, बायोटिन, एर्गोस्टेराल आदि मिलता है। बटन मशरूम में 27 फीसद तक उच्च गुणवत्ता वाली रेशा पाई जाती है। यह मोटापा दूर करने और कुपोषण से ग्रस्त महिलाओं व बच्चों के लिए भी उपयोगी होता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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