जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंद्रावती नदी में गैर मानसून काल में बनने वाली जलसंकट की स्थिति पर केंद्र सरकार ने केंद्रीय जल आयोग से रिपोर्ट मांगी है। जिसके बाद आयोग ने ओडिशा में बस्तर सीमा से पांच किलोमीटर दूर इंद्रावती जोरा नाला संगम में जलबहाव के आंकड़े एकत्र करना शुरू कर दिया है। आयोग के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय के अधीन गोदावरी परियोजना के अधीक्षण यंत्री पी देवेंद्र राव के नेतृत्व में 24 नवंबर को चार सदस्यीय दल ने संगम क्षेत्र का दौरा किया था। दल ने इंद्रावती और जोरा नाला में जलबहाव के आंकड़े लिए हैं। अगले साल जून मध्य तक हर सप्ताह सोमवार को आयोग की स्थानीय टीम ओडिशा जाकर संगम में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच इंद्रावती नदी के जल बंटवारा के लिए निर्मित कंट्रोल स्ट्रक्चर में जलबहाव का मापन करेगी।

इंद्रावती अनुमंडल जगदलपुर केंद्रीय जल आयोग के सहायक यंत्री प्रशांत राव का कहना है कि सप्ताह में एक दिन सोमवार को सीडब्लयूसी की स्थानीय टीम ओडिशा जाकर इंद्रावती-जोरा नाला संगम में निर्मित कंट्रोल स्ट्रक्चर से होने वाले जलबहाव के आंकड़े एकत्र करेगी। साप्ताहिक रिपोर्ट आयोग के हैदराबाद कार्यालय को भेजी जाएगी।

दरअसल, गोदावरी परियोजना की टीम ने अपनी जांच में पाया था कि इंद्रावती में 36 और 64 फीसद जलबहाव हो रहा है जो गौर मानसून काल में 50-50 फीसद जलबंटवारा के समझौते के अनुरूप नहीं है। विदित हो कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पिछले पांच सालों से लगातार ओडिशा और केंद्र सरकार को पत्र लिखकर गैर मानसून सीजन (16 अक्टूबर से 16 जून तक) ओडिशा से प्रदेश के हक का पानी नहीं मिलने की शिकायत की जा रही है। जिसे केंद्र में संज्ञान में लेते हुए केंद्रीय जल आयोग से रिपोर्ट मांगी है। जिस पर आयोग ने काम प्रारंभ कर दिया है। 11 जुलाई 2022 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडु ने बस्तर का दौरा किया था। उस दौरान उनके संज्ञान में इंद्रावती जल संकट का मामला लाए जाने पर उन्होंने कहा था कि वे गैर मानसून सीजन में कंट्रोल स्ट्रक्चर का अवलोकन करने आएंगे। इसके पहले केंद्रीय जल आयोग से रिपोर्ट ली जाएगी। साथ ही दोनों राज्यों से इंद्रावती जलसंकट पर द्विपक्षीय चर्चा का सुझाव देते हुए जलबंटवारे के लिए 1975 में हुए अंतर्राज्यीय समझौते की समीक्षा की जरूरत बताई थी। नईदुनिया ने 12 जुलाई 2022 को केंद्रीय राज्यमंत्री के इस बयान को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

जोरा नाला की सहायक बनी इंद्रावती नदी

ओडिशा में 174 किलोमीटर बहकर इंद्रावती नदी बस्तर में प्रवेश करती है। प्रवेश करने से पहले ओडिशा के कोरापुट जिले के ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी-जोरा नाला का है। जोरा नाला पहले इंद्रावती का सहायक नाला था लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। तीन दशक से अधिक समय से इंद्रावती का पानी जोरा नाला में प्रवाहित होने लगा है। यह प्राकृतिक घटना इंद्रावती में जलसंकट की स्थिति निर्मित कर रही है। 24 दिसंबर 2003 को दोनों राज्यों ने गैर मानसून काल में इंद्रावती नदी का दोनों राज्यों के बीच 50-50 फीसद पानी का बंटवारा करने का समझौता हुआ है। इसके लिए केंद्रीय जल आयोग की मध्यस्थता ओर उसी की ड्राइंग के आधार पर संगम में इंद्रावती और जोरा नाला में दो पक्के कंट्रोल स्ट्रक्चर का किया गया है। दावा किया था कि कंट्रोल स्ट्रक्चर की ड्राइंग-डिजाइन इस तरह तैयार की गई है कि गैर मानसून सीजन में कब जलबहाव वाले दिनों में स्ट्रक्चर से स्वमेव आधा-आधा पानी बंट जाएगा लेकिन यह दावा गलत साबित हो रहा है। इस शिकायत केंद्र सरकार ने केंद्रीय जल आयोग से जलबहाव पर रिपोर्ट मांगी है।

Posted By: Abhishek Rai

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