जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। एनएमडीसी ऑयरन एंड स्टील प्लांट (एनएमडीसी स्टील लिमिटेड) के डी-मर्जर पर कंपनी की दलीलों से असहमति जताते सुकमा जिला पंचायत अध्यक्ष कवासी हरीश ने उसे भ्रामक बताया है। स्टील प्लांट के डी-मर्जर को विनिवेशीकरण की प्रक्रिया का हिस्सा बताते उन्होंने कहा है कि कार्रवाई बस्तरवासियों के साथ धोखा है। गुरुवार को नगरनार में स्टील प्लांट के गेट में धरना पर बैठे कवासी हरीश ने मीडिया से चर्चा करते यह बात कही। उन्होंने एक प्रेस नोट भी जारी किया है, जिसमें एनएमडीसी से 10 सवाल पूछे गए हैं। हरीश का कहना है कि पांच दशक से अधिक समय से बस्तर में लौह अयस्क खनन और विक्रय कर रही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनएमडीसी का बस्तर से गहरा नाता रहा है। कंपनी ने डी-मर्जर को लेकर अपना पक्ष जारी किया है जो विश्वास करने लायक नहीं हैं बल्कि इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। ज्ञात हो कि हरीश जो प्रदेश के उद्योग मंत्री कवासी लखमा के पुत्र हैं और दो बार युवक कांग्रेस के बस्तर लोकसभा क्षेत्र के अध्यक्ष रह चुके हैं, ने विनिवेशीकरण और डी-मर्जर के विरोध में सुकमा से नगरनार तक पदयात्रा की अनुमति प्रशासन से मांगी थी, जिसे प्रशासन ने कोविड महामारी के संकट को देखते हुए ठुकरा दिया। अनुमति नहीं मिलने पर गुरुवार से स्टील प्लांट के सामने कवासी हरीश के नेतृत्व में चार युवकों ने धरना शुरू कर दिया है। धरना दो अक्टूबर गांधी जयंती तक चलेगा। पहले दिन हरीश के साथ पार्षद कमलेश पाठक, जिला पंचायत सदस्य धनुर्जय कश्यप और जनपद सदस्य तुलाराम धरना पर बैठे थे। बताया गया कि हर दिन चार पंचायत प्रतिनिधि धरना देंगे। धरना का समर्थन करने संयुक्त इस्पात मजदूर संगठन और स्टील श्रमिक यूनियन के पदाधिकारी महेन्द्र जॉन, संतराम सेठिया, जितेन्द्र नाथ, प्रभुनाथ आदि भी पहुंचे थे। मजदूर नेताओं ने धरना स्थल के बाहर एनएमडीसी, विनिवेशीकरण एवं डी-मर्जर के विरोध में नारेबाजी भी की।

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एनएमडीसी से पूछे गए यह 10 सवाल

01. डी-मर्जर का विनिवेशीकरण से संबंध है या नहीं?

02. क्या डी-मर्जर के बाद स्टील प्लांट का विनिवेशीकरण नहीं किया जाएगा?

03. डिपॉर्टमेंट ऑफ डिस इंवेस्टमेंट के पत्र में स्टील प्लांट का डी-मर्जर तथा स्ट्रेटजिक सेल का उल्लेख है, क्या यह सही है?

04. डी-मर्जर के बाद स्टील प्लांट एनएमडीसी के अधीन रहेगा या नहीं?

05. एनएमडीसी स्टील लिमिटेड नगरनार जो स्टील प्लांट का निर्माण कर रहा है, एनएमडीसी की सब्सिडियरी कंपनी है। एनएमडीसी की कितनी और सब्सिडियरी कंपनियां हैं? क्या ऐसी सभी कंपनियों का डी-मर्जर किया जाएगा?

06. एनएमडीसी के अनुसार डी-मर्जर से स्टील प्लांट का वित्तीय ढांचा मजबूत होगा, जो बस्तर, छत्तीसगढ़ के लिए लाभकारी होगा। क्या सभी सब्सिडियरी कंपनियों का डी-मर्जर कर क्षेत्रीय विकास को बढ़ाया जाएगा?

07. क्या बैलाडीला के बचेली- किरंदुल खनन इकाई के लिए एनएमडीसी नई कंपनियां बनाकर डी-मर्जर करेगा? ताकि दोनों इकाई स्वतंत्र औद्योगिक इकाई बनकर अभी जो टैक्स एनएमडीसी का मुख्यालय हैदराबाद में होने से तेलंगाना राज्य को जा रहा है, वह टैक्स छत्तीसगढ़ को मिलना शुरू हो जाए।

08. डी-मर्जर के बाद क्या स्टील प्लांट एनएमडीसी से अलग होकर स्वतंत्र सरकारी कंपनी बन जाएगी? या फिर दूसरी कंपनी बनाई जाएगी?

09. डी-मर्जर के बाद एनएमडीसी स्टील प्लांट का विनिवेशीकरण नहीं किया जाएगा। क्या विनिवेशीकरण और डी-मर्जर का आपस में कोई संबंध नहीं है?

10. एनएमडीसी को बस्तर के किसानों ने जिनमें आदिवासी भी शामिल हैं, प्लांट लगाने जमीन दी है, डी-मर्जर के बाद विनिवेशीकरण यदि किया जाता है तो क्या नई स्वतंत्र कंपनी एनएमडीसी स्टील लिमिटेड 51 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने हाथ में रखेगी?

Posted By: Nai Dunia News Network

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