CG Tadmetla Naxal Attack:जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिन‍िध‍ि। छत्तीसग़ढ़ के बीजापुर जिले केतर्रेम की घटना की वजह से प्रदेश के बस्तर संभाग में नक्सली हिंसा की चर्चा फिर देशभर में हो रही है। हालांकि यहां के नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी घटना छह अप्रैल 2010 को सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव में हुई थी। इसमें सीआरपीएफ के 75 और जिला बल के एक जवान शहीद हो गए थे। बस्तर में वैसे तो हर साल मार्च से जून के बीच बड़ी नक्सल वारदातें होती है पर ताड़मेटला का जिक्र आते ही आज भी लोग सिहर उठते हैं। नक्सलियों ने घात लगाकर सीआरपीएफ की कंपनी पर हमला किया और जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

नक्सली गर्मी में टेक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) चलाते हैं। इस दौरान जंगल में पतझड़ का मौसम होता है, जिससे दूर तक देख पाना संभव होता है। नदी-नाले सूखने के कारणएक जगह से दूसरी जगह जाना भी आसान होता है। नक्सली साल भर अपनी मांद में दुबककरसाथियों की मौत, गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण को चुपचाप देखते हैं। बाद में टीसीओसी में पलटवार करते हैं। अभी उनका टीसीओसी का सीजन ही चल रहा है।

इस दौरान उन्होंने नारायणपुर में ब्लास्ट कर पांच जवानों की हत्या की। तर्रेम में घात लगातार 22 जवानों की हत्या की। टीसीओसी के दौरान 15 मार्च 2008 को बीजापुर के रानीबोदली कैंप में हमला किया जिसमें 55 जवान शहीद हुए। 2013 में 25 मई को झीरम में कांग्रेस के काफिले पर हमला कर 31 लोगों की हत्या की। 2017 में 25 अप्रैल को सुकमा के बुरकापाल में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हुए। 23 मार्च 2020 को मिनपा में 17 जवान शहीद हुए। यह सूची काफी लंबी है पर ताड़मेटला की घटना भयावह थी।

खुले मैदान में घिरे थे जवान

चिंतलनार कैंप से करीब पांच किमी दूर ताड़मेटला गांव के पास गश्त कर रहे सीआरपीएफ के जवान नक्सलियों के झांसे में आकर जंगल के अंदर घुसे थे। वहां पेड़ों के पीछे नक्सलियों ने मोर्चा बना रखा था, जबकि जवान खुले मैदान में जाकर फंस गए। सुबह छह बजे शुरू हुई यह मुठभेड़ मुश्किल से एक घंटे ही चली थी। घायल जवान जब वायरलेस सेट पर पानी-पानी चीख रहे थे तो चिंतलनार थाने के एक हवलदार से रहा न गया। वह बख्तरबंद गाड़ी में पानी लेकर निकला। नक्सलियों ने वाहन को ब्लास्ट से उड़ा दिया। घटना के बाद पांच घायल ही बच पाए। बाकी सभी शहीद हो चुके थे।

प्रेस कांफ्रेंस कर दिखाए थे हथियार

ताड़मेटला में नक्सलियों ने जवानों के 80 हथियार भी लूट लिए थे। घटना के कुछ दिन बाद उसी इलाके के जंगलों में उन्होंने मीडिया को बुलाकर लूटे हथियारों की प्रदर्शनी लगाई थी। इस वारदात के बाद फोर्स ने रणनीति में बदलाव किया पर हर बार नक्सली नई रणनीति लेकर सामने आते रहे। घटना की जांच कई बार हुई। इस वारदात के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र बंद कमरे में हुआ। इन सबका क्या नतीजा हुआ यह कभी पता नहीं चला।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags