जगदलपुर। समाज में छुआछूत की भावना मिटाने के ध्येय से बरसों से राज्य सरकार की ओर से अंतरजातीय विवाह योजना चलाई जा रही है। इसके तहत अजा व सामान्य वर्ग के युवक-युवतियों के बीच विवाह संबंध बनाने पर शासन की ओर से ढाई लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। इसके बावजूद वर्ष 2018-19 में एक भी जोड़े से आवेदन आदिवासी विकास विभाग को प्राप्त नहीं हुए हैं।

बता दें कि पूर्व में केंद्र शासन की ओर से अनुसूचित जाति एवं सामान्य वर्ग के बीच वैवाहिक रिश्ते बनाए जाने पर डॉ भीमराव अंबेडकर योजना के तहत ढाई लाख रुपये दिए जाते थे। साथ ही, राज्य सरकार की ओर से प्रति जोड़े 50 हजार रुपए की राशि प्रदान की जाती थी।

वर्ष 2017-18 में राज्य सरकार ने यह राशि बढाकर केंद्र सरकार की तरह ढाई लाख रुपए प्रति जोड़ा कर दी है। इसके बावजूद योजना के प्रति जागरूकता नहीं होने से जोड़े आवेदन नहीं कर रहे हैं। हालांकि इसका आशय यह नहीं है कि समाज में अंतरजातीय विवाह नहीं हो रहे हैं।

जानकार बताते हैं कि अनुसूचित जाति एवं सामान्य वर्ग के युवक-युवतियों के बीच प्रेम विवाह के प्रकरण बढ रहे हैं। खासतौर पर शिक्षित युवा वर्ग में जांत-पांत की भावना खत्म हो रही है।

आर्य मंदिर के सूत्र इसकी तस्दीक करते बताते हैं कि उनके यहां रजिस्टर्ड विवाह करने पहुंचे अधिकतर जोड़े अंतरजातीय विवाह वाले होते हैं और इनमें अधिकतर प्रोफेशनल एमबीबीएस, आईआईटी व लॉ ग्रेजुएट के बैचमेट होते हैं। इसके दीगर कोर्ट मैरिज करने वाले जोड़े भी अलग-अलग वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। बस्तर में इन जोड़ों के द्वारा सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठाया जा रहा है जबकि रायपुर, दुर्ग व भिलाई में इस योजना में अधिक संख्या में आवेदन आ रहे हैं।

पांच साल में आए प्रकरण

वर्ष जोड़े देय राशि

2014-15 04 50 हजार

2015-16 04 50 हजार

2016-17 04 50 हजार

2017-18 04 02 लाख 50 हजार

2018-19 00 00

लाभ लेने यह है प्रक्रिया

योजना का लाभ लेने हेतु युवक या युवती में एक अनुसूचित जाति वर्ग का होना आवश्यक है। कोर्ट मैरिज या सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थान से पंजीकृत विवाह प्रमाणपत्र, राज्य का निवास प्रमाणपत्र के साथ निर्धारित प्रारूप में आदिवासी विकास विभाग को आवेदन किया जा सकता है। आवंटन मौजूद रहने की स्थिति मेें सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग द्वारा फौरन ही जोड़ों को यह राशि प्रदान की जाती है।

कम आवेदन मिल रहे

- 'योजना काफी सालों से चल रही है लेकिन क्षेत्र में कम ही आवेदन करते हैं। वर्ष 2018-19 में तो एक भी आवेदन नहीं आए हैं जबकि शासन की ओर से राशि दोगुना से अधिक कर दी गई है।' - आनंदजी सिंह, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग, बस्तर