जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

सोमवार को नाम वापसी के दिन निगम चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने वाले बागी नेताओं ने अपने-अपने दलों को खूब छकाया। काफी मान मनौव्वल के बाद आधा दर्जन नेता तो नाम वापस लेकर चुनाव मैदान से हट गए। इसके बाद भी दोनों दलों के 14 प्रमुख बागी नेता मैदान में डटे हुए हैं। इनमें कांग्रेस से छह और भाजपा से आठ बागियों का नाम सामने आया है। इनमें पूर्व पार्षद, नेता और टिकट की कतार में शामिल रहे कार्यकर्ता प्रमुख हैं। हालांकि पार्टियों के हिसाब से बागियों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है पर बाकी बागी ऐसे हैं जिनसे पार्टी नेताओं का मानना है कि चुनाव में कोई नुकसान नहीं होने वाला है। जिन बागियों से दोनों दलों के नेता वोट झिटकने की संभावना जता रहे हैं पार्टियां उन्हीं पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इसके पहले सुबह से ही दोनों दलों के बड़े नेता बागियों को चुनाव मैदान से हटाने के लिए लामबंद होकर प्रयासरत थे। कुछ बागी नेताओं ने सुबह नाम वापसी का समय शुरू होने के बाद भरोसा दिलाया था कि वे समय पर पहुंचकर नाम वापस ले लेंगे। इस कारण दोनों दलों के नेता कलेक्टोरेट में जमे थे। नाम वापस लेने का भरोसा दिलाने वालों में कुछ ने वादे के अनुसार समय पर पहुंचकर नाम वापस ले लिया लेकिन कुछ छकाते हुए पहुंचे ही नहीं। इन्होंने बाद में फोन भी बंद कर लिया था। तीन बजे के बाद इनके फोन तब ऑन हुए जब नाम वापसी का समय बीत चुका था।

इन्हें माना गया है बागी

कांग्रेस और भाजपा ने जिन नेताओं को बागी की सूची में रखा है उनमें कांग्रेस से मनीष गढ़पायले, जोगेश्वरी राव, डी सूर्याराव, स्वाति झा, राजेश राय और अब्दुल करीम शामिल हैं। इसी तरह भाजपा से अनिता श्रीवास्तव, मयंक नत्थानी, पितामह नायक, थनेश यादव, संजय मंडल, दीपक गुप्ता, मधुमिता कश्यप और चंद्रशेखर गोयल को बागी बताया गया है।

एक वार्ड से दो पूर्व पार्षद बागी

नगर निगम क्षेत्र के एक वार्ड से दो पूर्व पार्षदों ने बगावत का रास्ता अख्तियार किया है। मजे की बात यह है कि यह दोनों ही भाजपा के पार्षद रहे हैं। डा एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड से वर्ष 2004 में मधुमिता कश्यप व 2009 में चंद्रशेखर गोयल पार्षद चुने गए थे। इस बार भाजपा ने यहां से समरथ बेसरा को उम्मीदवार बनाया है। लिहाजा, यह दोनों नाराजगी जताते निर्दलीय मैदान में डटे हुए हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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