Chhattisgarh News नईदुनिया, जगदलपुर ।छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ अपने नाम के अनुरूप ही आज तक अबूझ है। यहां सड़क, बिजली, पानी आदि मूलभूत सुविधाओं का पूर्ण अभाव है। यहां के ऐसे इलाके में जहां बिजली के खंभे गाड़ना मुश्किल है, वहां छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अफसरों व कर्मचारियों ने कोरोना लॉकडाउन के दौर में सौर ऊर्जा उपकरण लगाए। दुर्गम क्षेत्र के नौ गांवों को रोशन कर दिया गया है। आदिम युग में जी रहे अबूझमाड़िया आदिवासी अपने घरों में रोशनी देख फूले नहीं समा रहे।

ओरछा ब्लॉक के ग्राम मेटानार में मनकूराम के घर बिजली पहुंची तो उसकी पत्नी खुशी से उछल पड़ी। वह बोली- इद हूड़ाय...वात बिजली, यानी लो जी, आ गई बिजली।

नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड में अबूझमाड़ का इलाका आता है। घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों से घिरे बेहद विषम भौगोलिक स्थिति वाले माड़ में विकास का काम दोहरी चुनौती वाला इसलिए भी है क्योंकि यहां नक्सली हैं। यह वह इलाका है जिसका राजस्व सर्वे मुगल और अंग्रेज भी नहीं कर पाए।

वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार प्रयास कर रही है पर दुर्गम गांवों तक पैदल पहुंच पाना आसान नहीं है। इन कठिन हालातों के बावजूद यहां के नक्सल हिंसा से ग्रस्त नौ गांवों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जा चुके हैं। मुख्य गांव रोशन हो चुके हैं। अब मजरों, टोलों तक लाइन खींची जा रही है ताकि अबूझमाड़िया बच्चे रात में भी पढ़ाई कर सकें।

कलेक्टर पीएस एल्मा ने क्रेडा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा है कि विकास ही नक्सल हिंसा से निपटने का कारगर कदम है। क्रेडा के सहायक अभियंता रविकांत भारद्वाज ने बताया कि ग्राम कोडकानार, आकाबेड़ा, कस्तुरमेटा, कटुलनार, ईरपानार, मेटानार, पोकनार, कलमानार, नेडनार और यहां स्थित आश्रम-छात्रावास सौर ऊर्जा संयंत्र से रोशन हो गए हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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