अनिल मिश्रा, जगदलपुर। नईदुनिया। Chhattisgarh News कभी जिस क्षेत्र से ट्रकों में इमारती लकड़ी निकलती। महुआ, चिरौंजी, तेंदूपत्ता, साल बीज से वनवासी मालामाल होते, वही गांव अंधेरे में ऐसा डूबा कि लोग उसका नाम तक भूल गए। अब फोर्स की मदद से इस गांव को दोबारा रोशन किया जा रहा है। अब इस क्षेत्र में तेलंगाना के रास्ते बिजली पहुंची है।

छत्तीसगढ़ के दक्षिणी छोर पर स्थित इस गांव का नाम है गोलापल्ली। जानकार बताते हैं कि यह इमारती गोलों का सबसे बड़ा केंद्र था। शायद इसीलिए गांव का नाम गोलापल्ली पड़ा। वन विभाग के लिहाज से महत्वपूर्ण होने की वजह से यहां रेंज दफ्तर भी खोला गया। इमारती लकड़ी का डिपो भी यहां है।

वन कर्मियों के आवास व दफ्तर के अलावा थाना इस गांव की पहचान रहे। नक्सली हावी हुए तो सब उजड़ गया। गोलापल्ली रेंज का दफ्तर अब नाम भर को वहां है। साप्ताहिक बाजार वनोपजों के संग्रह का केंद्र था। उसे भी नक्सलियों ने उजाड़ दिया। सरकारी भवनों को तोड़ दिया। स्कूल अस्पताल बंद हो गए। गांव के लोग नक्सलियों की मनमर्जी के गुलाम हो गए।

बिजली तब भी थी। समस्या तब आई जब दक्षिण बस्तर में नक्सल विरोधह अभियान सलवा जुडूम शुरू हुआ। 2005 में जुडूम शुरू हुआ। गांव के गांव नक्सलियों के खिलाफ खड़े होने लगे। उन्होंने इसका बदला बिजली काटकर दिया। तब से गोलापल्ली अंधेरे में डूबा है। अब फोर्स पहुंची तो बिजली लाइन भी पहुंच गई। ट्रांसफार्मर लगाया जा रहा है। इसी हफ्ते गोलापल्ली रोशनी से नहाएगा।

ऐसे बिछी लाइन

यह समूचा इलाका अति नक्सल प्रभावित है। बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता जेकब केरकेट्टा ने बताया कि केंद्र और राज्य की कई योजनाओं से ऐसे गांवों को बिजली दी जा सकती है पर जहां विद्युत कर्मियों की जान दांव पर हो, पर वहां कैसे काम करते? डीजीपी डीएम अवस्थी ने विश्वास, सुरक्षा व विकास की रणनीति बनाई।

जिस पर बस्तर पुलिस ने तत्परता से काम किया। तेलंगाना के कोत्तगुडम जिले में 11 केवी की लाइन से बिजली ली गई। बॉर्डर के पुलिस कैंप पइलीगुडम से होते हुए रामगुडम, तारलागुडम के रास्ते लाइन खींची गई। फोर्स ने पूरी सुरक्षा दी। बिजली पहुंच चुकी है। ट्रांसफार्मर लगते ही घरों में कनेक्शन दे दिए जाएंगे।

इनका कहना है

गोलापल्ली ही नहीं, इस तरह के सभी इलाकों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना हमारा लक्ष्य है। जहां कैंप खुलेंगे वहां समन्वित विकास केंद्र बनाया जाएगा।

-सुंदरराज पी, आईजी, बस्तर रेंज।

Posted By: Hemant Upadhyay