जगदलपुर। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी पर निर्माणाधीन पोलावरम बहुउद्देशीय राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत बांध में जलभराव का स्तर बढ़ाने की पोलावरम परियोजना प्राधिकरण की मांग को छत्तीसगढ़ से खारिज कर दिया है। छत्तीसगढ़ ने पोलावरम परियोजना के निर्माण पर रोक लगाने संबंधी आदेश के शिथिलीकरण की अवधि दो साल के आगे बढ़ाने पर भी असहमति जताई है।

छत्तीसगढ़ शासन का कहना है कि आंध्रप्रदेश सरकार और पोलावरम परियोजना प्राधिकरण द्वारा बांध में पूर्ण जलस्तर तक जलभराव होने से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सबरी नदी में बैक वाटर की स्थिति से डुबान में आने वाले संभावित क्षेत्र का चिन्हांकन करने के बाद ही जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। छत्तीसगढ़ द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों का परियोजना प्रभावित ओड़िशा ने भी समर्थन किया है। सोमवार को सबरी और सिलेरू नदी में बैकवाटर को लेकर जनसुनवाई आयोजित करने को लेकर प्रगति की वर्चुअल समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ और ओड़िशा दोनों राज्यों ने विरोध दर्ज कराया है।

वर्चुअल बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, पोलावरम परियोजना प्राधिकरण, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, आंध्रप्रदेश राज्य के अधिकारियों के साथ इंद्रावती परियोजना मंडल जगदलपुर और जलसंसाधन संभाग सुकमा के अधिकारी शामिल थे। पोलावरम परियोजना प्राधिकारण द्वारा बैठक में पोलावरम परियोजना के निर्माण की प्रगति से अवगत कराते हुए बताया गया कि वर्तमान में बांध के 46 में 40 गेट बंद किए गए हैं। बांध में क्रांकीट लेवल समुद्र सतह से 25.72 मीटर उंचाई के स्तर तक जलभराव किया गया है। बैठक में प्राधिकरण ने इसे बढ़ाकर 41.15 मीटर के स्तर तक ले जाने का प्रस्ताव दिया। साथ ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ एवं ओड़िशा में जनसुनवाई नहीं होने के कारण परियोजना के निर्माण पर रोक लगाने संबंधी आदेश की सशर्त शिथिलीकरण की अवधि दो साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र शासन को भेजे जाने की जानकारी भी दी गई।

अवधि समाप्त

ज्ञात हो कि फरवरी 2011 से ही जनसुनवाई की प्रत्याशा में एक-एक, दो-दो साल के लिए आदेश में छूट दी जा रही है। इस साल दो जुलाई को यह अवधि समाप्त हो गई है। जिसे बढ़ाने की मांग पोलावरम प्राधिकरण द्वारा की गई है। इन दोनों की प्रस्तावों पर छत्तीसगढ़ और ओड़िशा ने विरोध दर्ज कराते हुए सबरी और सिलेरू में बैक वाटर प्रभाव सहित रिड्यूज लेवल 177.44 फीट के आधार पर सर्वेक्षण कर लाइन विलेज मैप पर दर्ज करने तथा संयुक्त सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद ही जनसुनवाई आयोजित करने की बात कही है। विदित हो कि पोलावरम बांध से सुकमा जिले में सबरी नदी और ओड़िशा में सिलेरू नदी के बैकवाटर से मलकाननिगरी जिले में डुबान की आशंका जताई गई है।

आपत्तियों पर चर्चा के लिए बनेगी कमेटी

छत्तीसगढ़ औंर ओड़िशा द्वारा रखी गई आपत्तियों पर चर्चा कर निर्णय के लिए केंद्रीय जल आयोग ने एक कमेटी बनाने को कहा है। कमेटी में आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओड़िशा के साथ पोलावरम परियोजना प्राधिकरण सदस्य होंगे। ज्ञात हो कि ओड़िशा ने 2007 में, छत्तीसगढ़ ने 2011 और छत्तीसगढ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 2012 में पोलावरम परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर रखी हैं।

यह है छत्तीसगढ़ की आपत्ति

पोलावरम बांध के निर्माण के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन का कहना है कि गोदावरी जल विवाद प्राधिकरण के द्वारा पारित अवार्ड के अनुसार सुकमा में बैक वाटर सहित डुबान का अधिकतम जलस्तर रिड्यूज लेवल 150 फीट पर रखने पर सहमति हुई है। जिसे वह स्वीकार करता है लेकिन रिड्यूज लेवल 177.44 फीट तक ले जाने पर उनकी आपत्ति है।

जल आयोग को कराया अवगत

वर्चुअल बैठक में पोलावरम परियोजना को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार के रूख से केंद्रीय जल आयोग को अवगत करा दिया है। सुरक्षात्मक तटबंध नहीं बनाने की स्थिति में डुबान की लाइप विलेज मैप पर इंगित करके दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की गई है। आरएल 150 फीट से उपर की संभावित स्थिति के आधार पर संयुक्त सर्वेक्षण के बाद ही जनसुनवाई आयोजित की जा सकेगी।

अंबलगन पी, सचिव जलसंसाधन विभाग छग शासन

Posted By: Nai Dunia News Network

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