जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में चित्रकोट विधानसभा सीट का चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है। कांग्रेस बस्तर मुक्त भाजपा का सपना देख रही है तो भाजपा ने चित्रकोट सीट कांग्रेस से छीन कर दंतेवाड़ा की हार की भरपाई करने में पूरा जोर लगा दिया है। चित्रकोट की पहचान भले ही इंद्रावती नदी के पानी की वजह से है, लेकिन यहां लड़ाई जमीन की होगी। भूमि का मुद्दा ही प्रभावी नजर आने लगा है।

सालभर के भीतर तीसरी बार चित्रकोट के वोटरों को अपना नेता चुनना है, मुद्दा अब भी जमीन ही है। जमीन की लड़ाई में वोटों के हिस्सेदार वामपंथी दल भी बनते हैं। हालांकि आदिवासियों के हाथों से पुरखों की जो जमीन निकल गई थी उसे लौटाकर कांग्रेस की राज्य सरकार ने जो दांव खेला है उसकी काट निकालने में विपक्ष का पसीना अभी से छूटने लगा है।

चित्रकोट जलप्रपात दुनियाभर में मशहूर है। इसे एशिया का नियाग्रा कहा जाता है। मानसून अभी टला नहीं है। इंद्रावती लगातार उफान पर है। तेज गर्जना के साथ गिरते जलप्रपात की धुन आसपास के गांवों तक पहुंच रही है। अभी चित्रकोट उपचुनाव के प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल भले ही न किया हो, चुनाव का खुमार धीरे धीरे चढ़ने लगा है। चौपाल पर चर्चा हो रही है। भाजपा या कांग्रेस।

इसी बिंदु पर पानी की जगह जमीन का मुद्दा उभरता दिख रहा है। दरअसल 2008-09 में यहां टाटा का स्टील प्लांट लगाने के लिए तत्कालीन भाजपा सरकार ने 1707 किसानों की करीब पांच हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की थी। प्लांट तो नहीं लगा पर जमीन सरकार के कब्जे में ही रही।

आदिवासियों को 42 करोड़ 78 लाख का मुआवजा मिल चुका था। 2018 के अंत में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वादा किया कि अगर वह सत्ता में आई तो किसानों की जमीन लौटा दी जाएगी। उस चुनाव में कांग्रेस के दीपक बैज विजयी रहे।

15 साल बाद प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करते ही कांग्रेस ने पहला काम जमीन वापसी का ही किया। ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी परियोजना के लिए ली गई जमीन वापस लौटाई गई। लिहाजा कांग्रेस ने इस निर्णय के सहारे देशभर के आदिवासी इलाकों में संदेश देने का प्रयास किया। हालांकि इसका सबसे ज्यादा फायदा बस्तर में मिला।

25 साल बाद बस्तर में हुई कांग्रेस की वापसी

पिछले आम चुनाव में बस्तर लोकसभा सीट पर 25 साल बाद कांग्रेस को सफलता मिली। कांग्रेस ने चित्रकोट विधायक दीपक बैज पर ही दांव लगाया था। माना जाता है कि जमीन वापसी का सीधा असर नतीजों पर पड़ा। बैज सांसद चुने गए।

भाजपा का पक्ष भी कमजोर नहीं

चित्रकोट में कांग्रेस जमीन को मुद्दा बनाये रखना चाहती है पर भाजपा इसी एक मुद्दे पर कोई खास कमजोर हो जाएगी ऐसा नहीं लगता। इसकी एक वजह तो यह है कि एक ही मुद्दा कितनी बार चलेगा। दूसरा यह भी तो है कि भाजपा सरकार ने भले ही जमीन ली हो, उन्होंने टाटा को जमीन सौंपी नहीं थी। जमीन पर काबिज तो किसान ही थे। तभी वर्तमान सरकार आसानी से उसे लौटा पाई।