जगदलपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनजातीय संस्कृति को विलक्षण बताते हुए इसके संरक्षण एवं संर्वधन पर जोर दिया। उन्होंने कहा है कि संस्कृति का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरण आसान तरीके से हो सके इसके लिए प्रदेश सरकार भी चिंता कर रही है। सीएम बघेल रविवार को यहां जगदलपुर से चार किलोमीटर दूर ग्राम आसना में स्थापित बस्तर एकेडमी आफ डांस, आर्ट एंड लेंग्वेज (बादल) के नवनिर्मित परिसर का लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति के केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध बस्तर के लोक नृत्य, स्थानीय बोलियां, साहित्य एवं शिल्पकला के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में ठोस शुरूआत हो गई है। बादल की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस केंद्र के माध्यम से बस्तर की विभिन्ना जनजातीय संस्कृतियों को एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक हस्तांतरण करना, बाकी देश-दुनिया को इनका परिचय कराना, शासकीय कार्यों के सुचारु संपादन के लिए यहां के मैदानी कर्मचारी-अधिकारियों को स्थानीय बोली-भाषा का प्रशिक्षण देने का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा बस्तर की गौरवशाली संस्कृति की गूंज हिंदुस्तान ही नहीं पूरी दुनिया में सुनाई देती है। बादल एकेडमी के जरिये बस्तर की संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन के कार्य की तारीफ करते हुए कहा कि इस एकेडमी के जरिए बस्तर अंचल की नवोदित प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए एक अच्छा मंच प्रदान किया है।

पांच एकड़ में फैला है बादल का परिसर

बादल एकेडमी की स्थापना के लिए पर्यटन विभाग के जीर्णशीर्ण हो चुके आसना में निर्मित अनुपयोगी मोटल का चयन किया है। इसका क्षेत्रफल लगभग दो एकड़ था, लेकिन राजस्व विभाग एवं अन्य जमीन को मिलाकर इसके लिए लगभग पांच एकड़ जमीन तैयार की गई। जमीन मिलने के बादल एकेडमी की स्थापना की गई। अकादमी में प्रमुख रूप से लोकगीत एवं लोक नृत्य प्रभाग, लोक साहित्य प्रभाग, भाषा प्रभाग और बस्तर शिल्प कला प्रभाग होंगे। लोक गीत एवं लोक नृत्य प्रभाग के तहत बस्तर के सभी लोक गीत, लोकनृत्य गीत का संकलन, ध्वनिआंकन, फिल्मांकन एवं प्रदर्शन का नई पीढ़ी को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी तरह बस्तर की शिल्प कलाओं का प्रदर्शन एवं निर्माण करने की कला सिखाई जाएगी। एकेडमी परिसर में निर्माण व अन्य कार्यों पर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

वीर शहीदों के नाम पर किया गया भवनों का नामकरण

बादल एकेडमी में निर्मित तीन भवनों का नामकरण वीर शहीदों के नाम पर किया गया है। इनमें प्रशासनिक भवन का नाम शहीद झाड़ा सिरहा भवन, आवासीय परिसर का हल्बा जनजाति के शहीद गेंदसिंह के नाम पर और ग्रंथालय व अध्ययन भवन को धुरवा समाज के शहीद वीर गुंडाधूर के नाम पर किया गया है। कार्यक्रम में बादल एकेडमी और इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय के मध्य एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय द्वारा बादल एकेडमी में लोक नृत्य और लोक संगीत के लिए साझा तौर पर कार्य किया जाएगा। विश्वविद्यालय द्वारा बादल एकेडमी को मान्यता प्रदान करते हुए अपने पाठ्यक्रमों से संबंधित विधाओं का संचालन किया जाएगा।

पांच संस्थानों के मध्य हुआ एमओयू

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में थिंक बी और आइआइएम रायपुर, आइआइआइटी रायपुर, हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेस के साथ एमओयू किए गए। उद्यमिता और स्वरोजगार के इच्छुक बस्तर के युवाओं के स्टार्टअप्स को प्रमोट करने के लिए यह एमओयू किया गया। बादल अकादमी में ग्रंथालय, रिकार्डिंग रूम, ओपन थिएटर, डांस गैलरी, चेंजिंग रूम, गार्डन एवं आवसीय परिसर, कैफेटेरिया आदि बनाए गए हैं। इस अवसर पर उद्योग मंत्री एवं बस्तर जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा, सांसद दीपक बैज, राज्यसभा सदस्य फूलोदेवी नेताम, संसदीय सचिव रेखचंद जैन, विधायक मोहन मरकाम, राजमन बेंजाम, देवती कर्मा, चंदन कश्यप, विक्रम मंडावी, महापौर सफीरा साहू, निगम सभापति कविता साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि व विभिन्ना समाजों के पदाधिकारी व अधिकारीगण मौजूद थे। इस अवसर पर विभिन्ना समाजों को साज सज्जा, वेशभूषा और वाद्ययंत्र ख़रीदी के लिए 18 लाख 50 हजार राशि दी गई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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