जगदलपुर। किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन के कोरापुट सेक्शन में भी रेललाइन दोहरीकरण का काम तेज कर दिया गया है। जैपुर से कोरापुट की और क्षत्रीपुट स्टेशन तक नौ किलोमीटर तक दूसरी लाइन बिछाने का काम पूरा हो गया है। तीन दिसंबर को कमिश्नर रेलवे सेफ्टी दोहरीलाइन के परीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं। परीक्षण सफल रहने पर कोरापुट-क्षत्रीपुट के बीच भी दोनों लाइन पर रेल आवागमन शुरू कर कर दिया जाएगा।

इसके पहले एक और दो दिसंबर को नान इंटरलाकिंग के कार्य के लिए इस्ट कोस्ट रेल जोन भुवनेश्वर और वाल्टेयर रेलमंडल से तकनीकी विशेषज्ञों की टीम आएगी। ज्ञात हो कि 2012-13 में किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन (445 किलोमीटर) के दोहरीकरण की परियोजना लाई गई थी। बस्तर, ओड़िशा और आंध्रप्रदेश से होकर गुजरने वाली इस रेललाइन का निर्माण 1958 से 1966 के बीच किया गया था। इस सिंगल रेललाइन के दोहरीकरण के लिए किरंदुल से कोरापुट तक लागत राशि का वहन राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) द्वारा किया जा रहा है।

ओड़िशा के जैपुर से दंतेवाड़ा जिले के गीदम तक रेललाइन का दोहरीकरण कार्य पूरा हो चुका है। नक्सल प्रभावित किरंदुल सेक्शन में दोहरीकरण कार्य जारी है लेकिन इसकी रफ्तार काफी धीमी है। एनएमडीसी द्वारा दंतेवाड़ा जिले में बचेली किरंदुल लौह अयस्क उत्पादन इकाई में उत्पादन बढ़ाकर सलाना 45 मिलियिन टन तक ले जाने की है।

रेललाइन दोहरीकरण परियोजना महत्वपूर्ण

साथ ही नगरनार स्टील प्लांट के लिए कच्चे माल की आपूर्ति व पक्का माल बाहर निकालकर देश के विभिन्ना क्षेत्रों तक पहुंचाने में इस रेललाइन में भविष्य में पड़ने वाले ट्रैफिक के दबाव को ध्यान में रखकर रेललाइन दोहरीकरण परियोजना को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। इस परियोजना पर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च होने का अनुमान है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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