जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर स्थित लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में करीब एक माह पहले एक महिला के पांच माह के दुधमुंहे बच्चे के कथित अपहरण मामले में पुलिस के तात्कालिक न्याय पर सवाल उठ गया है। दरअसल, पुलिस ने जिस महिला पर चोरी का आरोप लगाते हुए उसके दुधमुंहे बच्चे को बरामद कर पीड़ित महिला को सौंपा था, डीएनए रिपोर्ट में मामला कुछ और निकला। आरोपित महिला ही दुधमुंहे की असली मां निकली । यह मामला उस समय चर्चा में आया जब बच्चे को अपना बताने का दावा करने वाली महिला ने पुलिस द्वारा कराए गए डीएनए रिपोर्ट पर सवाल उठाए। उसने जिला कोर्ट से निजी तौर पर डीएनए परीक्षण कराने की अनुमति मांगी है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए मंगलवार का दिन तय किया है।

बीते 11 मई को लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के चित्रकोट बहादुरपारा निवासी लक्ष्मी मौर्य ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसके दुधमुंहे का किसी ने अपहरण कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में संदिग्ध का स्कैच भी जारी किया था। मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने घटना के तीन दिन बाद नया बस स्टैंड के पास रहने वाली सविता यादव के कब्जे से करीब पांच माह का बच्चा बरामद कर लक्ष्मी से शिनाख्त करवाई थी।

लक्ष्मी ने उसे ही अपना बच्चा बताया था। वहीं आरोपित महिला भी उसे अपना बच्चा बता रही थी। पशोपेश में फंसी पुलिस ने इस पर डीएनए टेस्ट कराने का फैसला लिया और रिपोर्ट आने तक बच्चे को लक्ष्मी के सुपुर्द कर दिया था।

अब सेंट्रल लैब रायपुर से आई डीएनए रिपोर्ट में बच्चे के डीएनए का मिलान सविता यादव से होने का उल्लेख है। सविता ने बच्चे को हासिल करने के लिए पहले ही न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अभिषेक शर्मा की कोर्ट में परिवाद दायर किया था। वहीं न्यायालय ने डीएनए परीक्षण मिलने तक इंतजार करने की नसीहत दी थी।

आपत्ति लगाएंगे

अदालत में अनावेदिका ने अर्जी देकर निजी स्तर पर डीएनए परीक्षण की अनुमति चाही है, पर हमारे द्वारा आपत्ति लगाई जा रही है। निजी व शासकीय दोनों स्तर पर डीएनए जांच की कार्रवाई सरकारी लैब ही करती है। इसलिए पुन डीएनए परीक्षण औचित्यहीन है।

डी. वर्मा, अधिवक्ता

पुलिस ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी है। चालान के अवलोकन उपरांत जो भी फैसला अदालत का होगा, उसका परिपालन किया जाएगा।

राकेश कुमार कुर्रे, एसडीओपी, लोहंडीगुड़ा