जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद दिल्ली (एनसीइआरटी) में प्रोफेसर उषा शर्मा ने देश में शत प्रतिशत साक्षरता लक्ष्‌य प्राप्त करने को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा है कि सभी के सहयोग से लक्ष्‌य को प्राप्त करना असंभव नहीं है। उन्होंने शिक्षा को मानव का अधिकार बताया और कहा कि शिक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। यह लक्ष्‌य प्राप्ति की दिशा में शुभ संकेत है। नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के क्रियान्वयन को लेकर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बस्तर (डाइट) में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रोफेसर शर्मा ने देश में साक्षरता की वर्तमान दर लगभग 75 फीसद है। साल 2030 तक सौ फीसद साक्षरता दर प्राप्त करने का लक्ष्‌य तय किया गया है। कार्यशाला को एनसीइआरटी के साक्षरता मिशन की नोडल और विषय विशेषज्ञ तृप्ति उपाध्याय, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर के प्रशांत पांडे, डाइट बस्तर की प्राचार्य डा शुषमा झा ने भी संबोधित किया। मुख्य वक्ता प्रोफेसर उषा शर्मा ने अपने संबोधन में साक्षरता से जुड़े हर विषय पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने ने कहा कि शिक्षा मानवाधिकार है और इसे संविधान की अनुसूची 26 में स्थान दिया गया है। माता-पिता का शिक्षित होना जरूरी है, जिससे वे अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का चुनाव कर सकेंगे। साक्षर होने पर समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है, कई काम आसानी से संपादित कर सकते हैं। पढ़ना लिखना, गणित, वित्तीय साक्षरता, कानूनी साक्षरता, आलोचनात्मक विश्लेषण, सही निर्णय लेने की क्षमता साक्षरता के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है। उनका कहना था कि बीते दो साल में कोरोना आपदा के कारण शिक्षा से जुड़ी गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं लेकिन नवाचार के माध्यम से स्थिति को संभालने पूरा प्रयास किया गया। जिसमें माता-पिता की भूमिका भी कमतर नही रही थी। इस साल नवभारत साक्षरता कार्यक्रम (न्यू इंडिया लिटरेसी प्लान एनआइएलपी) प्रारंभ किया जा रहा है। जो 2027 तक चलेगा। 2030 तक संपूर्ण साक्षरता का लक्ष्‌य प्राप्त करने को लेकर अभी से तेजी से काम करने की जरूरत है। 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर लोगों को व्यस्क साक्षर लोगों से जोड़ा जाएगा। प्रतिवर्ष एक करोड़ के मान से पांच साल में पांच करोड़ असाक्षर को साक्षर बनाना है। शाला समय के पश्चात साक्षरता की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इसकी भी जानकारी उन्होंने कार्यशाला में विस्तार से दी।

16 बार छत्तीसगढ़ को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला

राज्य साक्षरता मिशन में सहायक संचालक प्रशांत पांडे ने पिछलें सालों में चलाए गए साक्षरता अभियान की चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश को अब तक साक्षरता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए 16 बार राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में भी अच्छा से अच्छा कार्य करके दिखाना होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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