जगदलपुर। वन उत्पादों की ब्राडिंग, मार्केटिंग और पैकेजिंग में बेहतर प्रदर्शन न कर पाने को लेकर ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्ण ने निराशा जताई है। बस्तर संभाग के तीन दिन के दौरे पर आए प्रवीर कृष्ण ने शुक्रवार को यहां कलेक्टोरेट में वनोपज आधारित विकास के लिए आयोजित संभाग स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते कहा कि वन उत्पाद आदिवासी संस्कृति में आजीविका का प्रमुख साधन है। इन उत्पादों के बेहतर मार्केटिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विक्रय केंद्रों का विकास पर जोर दिए जाने की आवश्यकता है।

विदित हो कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन से पूर्व प्रवीर कृष्ण अविभाजित बस्तर जिले के आखिरी कलेक्टर रहे। ट्राइफेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के तत्वावधान में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध निदेशक संजय शुक्ला, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक बी आनंद बाबू, संभागायुक्त जीआर चुरेंद्र, सीसीएफ मोहम्मद शाहिद और अभय कुमार श्रीवास्तव सहित बस्तर, कोंडागांव कलेक्टर सहित संभाग के सभी जिलों के जिपं सीइओ, डीएफओ एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्रवीर कृष्ण ने कहा कि हालांकि पहले और अब की स्थिति में संग्रहण, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और पैकेजिंग में काफी बदलाव आया है लेकिन इसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। इस क्षेत्र में काम करने की भरपूर संभावना है। वन उत्पादों के उपार्जन और प्रसंस्करण के लिए बस्तर संभाग के अधिकारियों ने आपसी समन्वय और टीम भावना के साथ कार्य किया है। इस कारण क्षेत्र के वन संग्राहकों को आर्थिक लाभ मिला है।

वन धन केंद्र डिजिटल सिस्टम से जुड़े

प्रबंध निदेशक का कहना था कि वर्तमान समय में वनधन केंद्र को डिजिटल सिस्टम से जोड़ते हुए एकीकृत कंट्रोल सिस्टम बनाने तथा वन धन समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाना जरूरी है। उन्होंने वन धन केंद्रों के अधोसंरचना विकास और वन उत्पाद के लिए उद्योगों को विकसित करने की आवश्यकता बताई। बस्तर संभाग के स्थानीय कलाकृति को प्रदर्शित करने वाले हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम से संबंधित शिल्पकारों को मार्केट से जोड़ने का काम ट्राइफेड के द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए जिला स्तर पर शिल्पकारों का चिन्हांकन करने की आवश्यकता है ताकि शिल्पकारों को विश्व स्तरीय मार्केट से जोड़ा जा सके। इससे शिल्पकारों को आर्थिक लाभ के साथ सम्मान भी प्राप्त होगा।

वनोपज का 75 फीसद संग्रह बस्तर से

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध निदेशक संजय शुक्ला ने बस्तर संभाग के वनोपज संग्रह की सराहना करते बताया कि छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज संग्रह का 75 प्रतिशत हिस्सा बस्तर संभाग से होता है। संग्रहण केंद्रों में वन उत्पाद की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई है। राज्य सरकार 73 वन उत्पादों की खरीदी इस दर पर कर रही है। सीसीएफ मोहम्मद शाहिद ने बताया कि जगदलपुर वन मंडल में बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले आते हैं जहां 24 वनधन केंद्र, 108 हाट-बाजार, 375 ग्राम स्तर के समूह द्वारा वनधन खरीदी की जाती है।

6679 हितग्राहियों द्वारा एक लाख दो हजार क्विंटल वनोपज संग्रहित किया गया है। संग्राहकों को 28 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। आगामी वर्ष के लिए दो लाख क्विंटल का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में वनोपज संग्रह के विकास, स्थानीय आदिवासियों को आर्थिक लाभ दिलाने और वनोपज की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापना के संबंध में आवश्यक चर्चा की गई। ट्राइफेड के माध्यम से वनोपज को बेहतर मार्केट उपलब्ध कराने भी विस्तृत चर्चा की गई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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