जगदलपुर। बस्तर की संस्कारधानी जगदलपुर शहर में आज भी 17 प्राचीन कुएं (नगरनिगम के रिकार्ड में) मौजूद हैं। जिनमें कुछ जर्जर अवस्था को प्राप्त कर खंडहर में बदल चुके हैं तो कुछ उसी दिशा में अग्रसर हैं। प्राचीन कुओं की चर्चा हो और शहर के प्रमुख व्यवसायिक स्थल मेन रोड में जवाहर साइकिल स्टोर्स के पीछे स्थित कुएं का जिक्र नहीं हो यह इसके साथ उचित न्याय नहीं होगा।

सर्किट हाउस मार्ग पर चौक पर स्थित इस कुएं का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है। आज इसके तीन दिशाओं में उंची इमारतें खड़ी हैं और जिसे कुएं की स्थिति की जानकारी नहीं है वह आसपास के रहवासियों से पूछकर ही वहां तक पहुंच सकता है। आसपास के निवासी बताते हैं कि इस कुएं की आज से 60-70 साल पहले शहर में काफी चर्चा होती थी। इसकी वजह इसका शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में होना था। तड़के से लेकर देर रात तक यहां पानी भरने वालों की भीड़ लगी रहती थी। पेयजल के लिए आसपास के क्षेत्र की बड़ी आबादी की निर्भरता इस कुएं पर रही थी।

आज कुएं जर्जर अवस्था को प्राप्त कर चुका है। कचरे से आधा से अधिक पट चुका है। कुआं और इसके आसपास 150 से 200 वर्गफीट जमीन खाली है। इसलिए सड़क से ही कुएं के दर्शन हो जाते हैं। कुआं यदि अपनी बात रख पाता तो शायद उसके बोल कुछ इस तरह के होते। मैं कुछ दिन का और मेहमान, जाने कब अस्तित्व मिट जाए। यदि जागरूक लोग मुझे बचाने आगे आएंगे तो ही मेरा अस्तित्व बच सकेगा। जब जरूरत थी लोगों ने इस कुएं का खूब ध्यान रखा अब यहां कोई झांकता तक नहीं है। यह सही है कि समय और आवश्यताएं परिवर्तनशील हैं। जब भूगर्भीय जल के दोहन का एकमात्र संसाधन केवल कुएं थे उस दौर में इनका कितना महत्व रहा होगा इस बात की कल्पना की जा सकती है।

कुएं की भी पूजा होती है

सनातन धर्म में कुएं की भी पूजा होती है और वह दिन दूर नहीं जब एक-एक करके कुएं अस्तित्व खोते जाएंगे और पूजा अर्चना के लिए दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर कुएं की खोज करने की विवशता होगी। इस प्राचीन कुएं को भी बचाए रखने की जरूरत है। कुछ जग जमीन के लिए कुएं को जमीजोंद करना उचित नहीं होगा। आसपास के निवासियों ने बताया कि डेढ़ दशक पहले जिला प्रशासन ने कुएं का जीर्णोद्धार कराया था फिर इसके बाद किसी ने सुध नहीं ली।

Posted By: Nai Dunia News Network

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