जगदलपुर Jagdalpur News: । बस्तर में सिंचाई की सुविधा में विस्तार के लिए इंद्रावती नदी पर बहुउद्देशीय परियोजना बोधघाट को शुरू करने की दिशा में प्रयासरत प्रदेश सरकार ने इसी नदी पर दो बैराज बनाने की दिशा में भी काम तेज कर दिया है। एक सप्ताह पहले लोहंडीगुड़ा और बस्तर ब्लाक की सीमा पर मटनार में बैराज के सर्वेक्षण के लिए जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक मंजूरी प्रदान कर दी है। जल्दी ही देउरगांव में प्रस्तावित एक अन्य बैराज के सर्वेक्षण के लिए भी मंजूरी मिलने की संभावना है। इन दोनों बैराज के मामले में उल्लेखनीय बात यह है कि इनके निर्माण से सरकारी राजस्व, निजी अथवा वन भूमि में से किसी भी एक इंच भूमि डूबान में नहीं आएगी। दोनों बैराज के निर्माण से बस्तर जिले में करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। चालू वित्तीय वर्ष के राज्य बजट में इन दोनों बैराज के प्रस्ताव शामिल हैं। नईदुनिया ने पिछले साल 14 सितंबर को खबर प्रकाशित कर इंद्रावती नदी में दो बैराज के निर्माण से संबंधित प्रस्ताव की जानकारी दी थी।

सिंचाई, पेयजल के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

मटनार में इंद्रावती नदी पर बनने वाले बैराज की दूरी चित्रकोट जलप्रपात के नीचे छह किमी दूर होगी। बैराज की उंचाई 32 मीटर और लंबाई करीब 600 मीटर प्रस्तावित की गई है। इसके बनने से 700 हेक्टेयर खरीफ और 500 हेक्टेयर रबी का सिंचाई रकबा होगा। इसका पानी चित्रकोट जलप्रपात के नीचे तक पूरे 12 माह भरा रहेगा। कम से कम दो मीटर तक गहराई तक पानी रहने से पर्यटन की दृष्टि से वोटिंग की सुविधा भी शुरू की जा सकेगी। इसी तरह जगदलपुर से 12 किलोमीटर दूर देउरगांव बैराज के निर्माण से इसका पानी कुम्हरावंड एनीकट तक पूरे साल भर भरा रहेगा। इससे भी करीब 1500 हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। कोसारटेडा बांध की तर्ज पर इन दोनों बैराज से 70 से अधिक गांवों तक पेयजल की आपूर्ति भी की जा सकेगी।

मोटरबोट में निकले थे कलेक्टर पुलिस अफसरों के साथ साइट तलाशने

पिछले साल 13 सितंबर 2019 को तत्कालीन कलेक्टर डा अ्रयाज तंबोली, आइजी विवेकानंद सिन्हा जल संसाधन विभाग के इंजीनियर बीएस भंडारी, आरएस पांडे, धर्मेंद्र मेश्राम आदि के साथ जगदलपुर से चित्रकोट तक इंद्रावती नदी में बैराज के लिए उपयुक्त स्थल की तलाश में मोटरबोट में सफर किया था। करीब 165 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले दोनों बैराज से डूबान शून्य होने के कारण इसके काफी फायदे बताए जा रहे हैं। डूबान नहीं होने से बैराज निर्माण से ग्रामीणों को भी आपत्ति नहीं हैं। जल संसाधन विभाग के इंद्रावती परियोजना मंडल के अधीक्षण यंत्री शेख शाकिर से चर्चा करने पर उन्होंने मटनार बैराज के सर्वेक्षण के लिए राज्य शासन की प्रशासनिक मंजूरी मिलने की पुष्टि करते बताया कि सर्वेक्षण एवं डिटेल प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए 19.56 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। छह माह के अंदर सर्वेक्षण का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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