Indravati River: जगदलपुर। बस्तर में प्राणदायिनी का दर्जा प्राप्त इंद्रावती नदी को बचाने की मांग को लेकर जन आंदोलन खड़ा करने में दो बुजुर्गों की बड़ी भूमिका रही है। इनमें एक पूर्व मंत्री स्वर्गीय रामचंद सिंहदेव और दूसरे पद्मश्री धर्मपाल सैनी है। पूर्व मंत्री एवं जल संसाधन मामलों मे विशेषज्ञ रहे स्वर्गीय रामचंद सिंहदेव ने मंत्री रहते हुए इंद्रावती नदी की समस्या के समाधान के लिए ठोस किया। सक्रिय राजनीति के सन्यास लेने के बाद भी जीवन पर्यन्त इंद्रावती नदी की समस्या के समाधान के लिए काम करते रहे थे।

रामंचद सिंहदेव ने अविभाजित मध्यप्रदेश के समय जल संसाधन मंत्री रहते हुए इंद्रावती नदी-जोरा नाला की समस्या के समाधान के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और ओड़िशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री गिरधर गोमांगो के साथ बैठक में मौजूद थे। बैठक मई 1999 में यहां बस्तर में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम के फार्महाउस तेलीमारेंगा में हुई थी। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद भी समस्या के समाधान के लिए वह सक्रिय रहे। उन्होंने इंद्रावती-जोरा नाला संगम में कंट्रोल स्ट्रक्चर निर्माण के लिए 2003 में ओड़िशा जाकर समझौते के लिए वहां के मुख्यमंत्री को राजी किया था।

उस समय सिंहदेव प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री थे। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद भी इंद्रावती को लेकर उनका लगातार बस्तर आना-जाना बना रहा था। 80 साल से अधिक की उम्र होने के बाद भी वह कई बार ओड़िशा गए और वहां गन्नो के खेतों से गुजरकर कठिन रास्ता तय करते इंद्रावती नदी जलसंकट की स्थिति को देखते और समाधान के लिए प्रयास करते रहे। जब भी जगदलपुर आते थे यहां पत्रवार्ता लेकर इंद्रावती को बचाने को लेकर जन आंदोलन खड़ा करने की सलाह देते थे। उनका मानना था कि इंद्रावती के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए नर्मदा नदी घाटी विकास प्राधिकरण की तर्ज पर एक प्राधिकरण बनाना चाहिए।

ओड़िशा सीमा से लेकर चित्रकोट तक पदयात्रा

इंद्रावती नदी कछार विकास प्राधिकरण के गठन की मांग उठने पर पूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने छह मई 2013 को घोषणा की थी लेकिन उनकी सरकार इसे पूरा नहीं कर पाई। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर प्राधिकरण गठन की मांग का शोर बना रहे इसके लिए 90 साल से अधिक उम्र के पद्मश्री धर्मपाल सैनी के नेतृत्व में पर्यावरण प्रेमियों और इंद्रावती के संरक्षण के लिए काम करने वालों ने आठ मई से 21 मई 2021 तक 13 दिनों की पदयात्रा की थी। इंद्रावती की रेत तो कभी कटाव भरे तटबंध से होकर कारवां ओड़िशा सीमा से लेकर चित्रकोट तक पैदल चला था। सैनी ने बस्तर चेंबर आफ कामर्स सहित विभिन्ना संघ संगठनों को मुहिम से जोड़ा और युवाओं की फौज खड़ी कर मुद्दे को जीवंत बनाए रखा।

पदयात्रा ने बढ़ाया दबाव

पदयात्रा से बने दबाव का असर हुआ। पदयात्रा समाप्त होने के नौ दिनों बाद 30 मई को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्राधिकरण गठन की मांग को पूरा करने की घोषणा की। इस मांगो को पूरा कराने में बस्तर के विधायकों और सांसद का भी भरपूर साथ मिला। 26 अगस्त 2021 को प्राधिकरण के गठन की अधिसूचना का प्रकाशन राजपत्र में कर दिया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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