हेमंत कश्यप, जगदलपुर। Interesting News : देश में 68 साल पहले 1952 में विलुप्त घोषित चीतों में से एक चीता का सिर यहां बस्तर राजमहल के दरबार हाल की शोभा बढ़ा रहा है। देश में चीतों की मौजूदगी के अंतिम प्रमाण 1947 में मिलते हैं। इसी साल छत्तीसगढ़ के कोरिया (मध्य प्रदेश) के महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने बैकुंठपुर के सलका जंगल में अंतिम बचे तीन चीतों का शिकार किया था। इन्हीं में से एक चीता का सिर कोरिया राजपरिवार ने बस्तर महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव को भेंट किया था। यह सिर आज भी जगदलपुर राजमहल के दरबार हाल में शोभायमान है।

सत्तर साल के बाद देश में चीतों को बसाने की तैयारी जोरों पर चल रही है। रणथंभौर फाउंडेशन, चाणक्यपुरी नई दिल्ली द्वारा संकटग्रस्त वन्यजीवों पर वर्ष 1997 में विशेष अंक प्रकाशित किया गया था। उसमें भारत में विलुप्त एक शालीन जीव चीता पर विशेष आलेख भी प्रकाशित है। उसमें उल्लेखित है कि देश के आखिरी चीते मध्य प्रदेश, बिहार और ओडिश्ाा में देखे अथवा मारे गए थे। आखिरी तीन चीते कोरिया में 1947 में मारे गए थे। महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने इनका श्ािकार किया था।

तीनों चीते नर थे

बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव बताते हैं कि उन दिनों शिकार किए वन्यजीवों की ममी बेंगलुरु में बनाई जाती थी। सलका जंगल में मारे गए चीतों का सिर और खाल कोरिया के महाराजा ने बेंगलुरु भिजवाया था। इनमें से दो चीतों की ममी कोरिया राजमहल में रखी गई हैं। वहीं तीसरे चीते की ममी कोरिया के महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव ने बस्तर के महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव को सत्ता का पूर्ण अधिकार मिलने की खुशी में भेंट किया था। बस्तर से कोरिया राजपरिवार का संबंध वर्षों पुराना है। इस तरह 73 साल पुराना चीता का वह सिर आज भी जगदलपुर राजमहल के दरबार हाल में प्रवीरचंद्र की तस्वीर के ठीक ऊपर टंगा है।

बस्तर-कोरिया महाराजा में समानता

कोरिया नरेश रामानुज प्रताप सिंहदेव का जन्म 1901 में हुआ और 1909 को मात्र नौ वर्ष की अल्पायु में उन्हें राजा बनाया गया। बालिग होने पर उन्हें सत्ता का पूर्ण अधिकार मिला। इसी तरह वर्ष 1929 में जन्मे बस्तर महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव का छह वर्ष की उम्र में 1935 में राजतिलक किया गया था। उन्हें भी बालिग होने पर जुलाई 1947 में सत्ता का पूर्ण अधिकार दिया गया था। कोरिया के महाराजा ने 15 दिसंबर 1947 को और बस्तर के महाराजा ने एक जनवरी 1948 को विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर अपनी-अपनी रियासतों का विलय भारत गणराज्य में किया था।

Posted By: Ravindra Thengdi

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