Jagadalpur News: अनुराग शुक्ला, जगदलपुर। बस्तर के थानों में व्यवस्था बदली नजर आ रही है। यहां अब रात को भी सजगता है। थाने में यह आलम है कि जागते रहो, कप्तान कब और कैसे आएंगे पता नहीं। बस्तर के एसएसपी जीतेंद्र मीणा ने काम का अनूठा तरीका निकाला है। वे समय की बचत के साथ ही पुलिस के दायित्व का अहसास दिलाने में लगे हैं। खुद भी शहर की गलियों से लेकर नुक्कड़ तक की जानकारी रखना चाहते हैं। इसलिए कभी भी किसी भी वक्त अपने किसी मातहत के साथ स्कूटी हो या मोटरसाइकिल वे निकल पड़ते हैं। किसी को नहीं मालूम है कि पुलिस महकमे का कप्तान आम नागरिक बनकर घूम रहा है।

मीणा का मानना है कि जब तक वे खुद धरातल पर स्थिति को समझेंगे नहीं, अपने मातहतों से किस तरह से काम ले सकेंगे। शहर की गलियों को जानना इसलिए भी आवश्यक है कि यह मालूम होना चाहिए कि कैसी बसाहट कहां है। आरोपितों का इलाका कहां है, अपराध का इलाका कहां है, अपराधी अपने ठिकानों तक किस रास्ते से जाते हैं। शहर की पुलिसिंग में यदि कोई कमी बेसी उन्हें दखती है तो मौके पर खुद को जाहिर नहीं करते, संबंधित जवान के लिए साइबर सेल से पाइंट चलाया जाता है।

हालांकि उन्होंने अब तक किसी भी पुलिस कर्मी के खिलाफ छोटी लापरवाही पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की है। आमतौर पर एसएसपी मीणा अपने मुंह पर मास्क लगाकर दुपहिया वाहन की सवारी करते हैं। छठ के दिन वे घाट का जायजा लेने निकले और इस दिन उन्होंने मास्क भी नहीं पहना था। इत्तेफाक से नईदुनिया के कैमरे में मीणा कैद हो गए।

क्राइम मीटिंग का बदला सिस्टम

मीणा ने क्राइम मीटिंग का सिस्टम बदल दिया है। पहले क्राइम मीटिंग का दिन और समय तय होता था। अब ऐसा नहीं हो रहा है। एसपी खुद ही थानेदार को सूचित कर थाने पहुंचते हैं और काम की समीक्षा करते हैं। सबडिवीजन की मीटिंग को जल्द निपटाकर समय की बचत की जाती है। मीणा ने जब जिले की कमान संभाली तो सराफा कारोबारी पर गोली चलाकर लूट की वारदात सामने आई थी। लुटेरे इतने शातिर थे कि उन्होंने मोबाइल का उपयोग ही नहीं किया था। सीसीटीवी में भी पकड़ में नहीं आ रहे थे। मीणा ने दिनरात कंट्रोल रूम में डेरा डाल दिया। रात दो बजे गश्ती टीम के सिपाहियों से बात करते थे। आखिरकार पुलिस ओड़िशा के लुटेरों तक पहुंच ही गई।

कुछ ऐसा भी देखने में आया है

एसएसपी कभी भी कहीं भी अचानक निकल पड़ते हैं। बुधवार सुबह वह महादेवघाट पहुंचे यहां पर बरगद की परिक्रमा की और इसके बाद घाट को देखा। इसके बाद उन्होंने सभी घाटों में पुलिस जवानों की तैनाती और स्थिति का जायजा लिया। दलपतसागर, पुराना पुल और प्रमुख तौर पर गंगामुंडा तट भी पहुंचे। इससे पहले दिवाली के एक दिन पहले जैन मंदिर रोड पर मीणा अकेले पैदल चल रहे थे। लोगो को मालूम ही नहीं था कि यह व्यक्ति जिले का एसपी है। उनके गार्ड दूरी बनाए हुए थे। एसएसपी सामान्य आदमी की तरह मोबाइल की एक दुकान में पहुंचे। यहां पर उनकी पहचान नहीं हो सकी। किसी मीडियाकर्मी ने जब उन्हें देखा तो पता चला कि एसपी बाजार में अकेले बेबाकी से घूम रहे हैं।

हर अधिकारी का अपना वर्क स्टाइल

हर अधिकारी का अपना वर्क स्टाइल होता है। मेरा यह विश्वास है कि जब हम अपने जवान या अधिकारी को किसी काम के लिए बोलते हैं तो उसे क्या परेशानी होती होगी यह बात ग्राउंड लेवल पर जाने से समझ आती है। इससे समय पर अपने काम को धरातल में उतारने में आसानी होती है। यही नहीं शहर से वाकिफ होने से आरोपियों की जानकारी, अपराध वाले इलाके और समय पर अपराध होने पर टारगेट पाइंट व नाकेबंदी का सही निर्णय लिया जा सकता है। - जितेंद्र मीणा, एसएसपी बस्तर

Posted By: Nai Dunia News Network

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