जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

शहर मध्य वर्षों पुराना खेल मैदान प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बदतर होता जा रहा है। वहीं इस मैदान को पार्किग बनाकर वाहन संचालकों ने और बर्बाद कर दिया है। हाता मैदान में तीन गेट और हाइमास्क लाइटें होने के बावजूद मैदान आवारा मवेशियों का चारागाह बनकर रह गया है, इसलिए खेल प्रेमियों में काफी नाराजगी देखी जा रही है।

हाता मैदान शहर के विभिन्न एतिहासिक आयोजनों और खेलों का गवाह रहा है लेकिन इन दिनों यह मैदान पूरी तरह से नगर निगम की प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। बीते 15 साल में हाता मैदान के विकास के लिए कई योजनाएं बनी। खेल प्रेमियों द्वारा प्रदर्शनी और पटाखा दुकान लगाने का विरोध भी हुआ, लेकिन आयोजनों के बाद किसी ने हाता मैदान की तरफ ध्यान नहीं दिया। अब निगम चुनाव के पहले नागरिकों को लुभाने के लिए हाता मैदान के लिए 75 लाख रूपए का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसके तहत मैदान के चारों तरफ तार की ऊंची जाली लगाने के अलावा रेस्टोंरेंट के साथ बेहतर प्रसाधन केद्र भी बनाए जाने की बात कही जा रही है।

लोंगों का कहना है कि योजनाएं धरातल पर आएंगी तब देखा जाएगा लेकिन हाता मैदान की जो दशा अभी है, इसके लिए पूरी तरह से प्रशासन ही जिम्मेदार है। हाता मैदान के चारों तरफ दीवार है। वहीं तीन गेट भी हैं। ऊपर बेहतर हाइ मास्क लाईट की भी व्यवस्था की गई है परन्तु मैदान में बेतरतीब वाहन खड़ी करने वालों को तथा आवारा मवेशियों को रोकने के लिए गेटों को बंद करने का प्रयास नहीं किया गया। इधर हाता मैदान में कई बाजार गाड़ियों और दर्जनों ऑटो वालों के आने-जाने से यह मैदान गड्ढों से भर गया है। जब भी बच्चे यहां क्रिकेट आदि स्पर्धा कराते हैं तब वे स्वयं इन गड्ढों को भरते हैं। खेल प्रेमी हरिश साहू, मदनलाल नाग, अनुराग शुक्ला, सतपाल शर्मा आदि का कहना है कि हाता मैदान के गेटों को बंद किया जाए और समयानुसार खोला जाना चाहिए लेकिन यहां के तीनों गेटों को खोल कर मैदान को मवेशियों के लिए चारागाह और शाम ढलते ही मद्यप्रेमियों के लिए खुला मयखाना बना कर रख दिया गया है। विडंबना यह है कि बिना कारण यहां की हाइमास्क लाइटें जलती रहती हैं। निगम प्रशासन को कम से कम बिजली बचाने की दिशा में ही पहल करनी चाहिए।