जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रधानमंत्री कार्यालय के ड्रीम प्रोजेक्ट की सूची में शामिल जगदलपुर-रावघाट-दल्लीराजहरा रेललाइन परियोजना को पूरा करने में हो रही देरी को लेकर सोमवार को रेलवे बोर्ड रेलवे विकास निगम और बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड के अफसरों से सीधा सवाल-जवाब करेगा। रेलवे बोर्ड ने देश भर में चल रही रेल परियोजनाओं के काम की प्रगति की समीक्षा के लिए रेल भवन में बैठक बुलाई है। रेल परियोजनाओं को दो चरणों में विभक्त कर समीक्षा रखी गई है। पहले चरण में ऐसी रेल परियोजनाएं जो पीएमओ के ड्रीम प्रोेजेक्ट की सूची में शामिल हैं उनकी समीक्षा होगी और बाद में अन्य परियोजनाओं की प्रगति देखी जाएगी। केन्द्र में लगातार दूसरी बार एनडीए सरकार बनने के बाद रेलवे बोर्ड द्वारा यह समीक्षा बैठक है। विदित हो कि पिछले दिनों ही स्टील मिनिस्ट्री ने भी नगरनार स्टील प्लांट और स्लरी पाइप लाइन प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा के लिए दिल्ली में एनएमडीसी के अफसरों को बुलाया था। गौरतलब है कि बस्तर संभाग में निर्माणाधीन नगरनार ऑयरन एंड स्टील प्लांट, स्लरी पाइप लाइन प्रोजेक्ट और जगदलपुर-रावघाट-दल्लीराजहरा रेललाइन ये तीन परियोजनाएं पीएमओ के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल हैं। केके रेललाइन के दोहरीकरण प्रोजेक्ट का नाम भी इसी बैठक में समीक्षा के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

प्रभाकर और अरविंद शर्मा होंगे बोर्ड की बैठक में

रावघाट-जगदलपुर रेललाइन परियोजना की समीक्षा बैठक में बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड के सीईओ व्हीएस प्रभाकर और इरकॉन के एजीएम अरविंद शर्मा शामिल होंगे। अरविंद शर्मा दिल्ली पहुंच चुके हैं। व्हीएस प्रभाकर हैदराबाद में हैं और वे सोमवार सुबह हैदराबाद से सीधे दिल्ली पहुंचेंगे।

प्रधानमंत्री ने कराया था एमओयू, रेल राज्यमंत्री ने किया था भूमिपूजन

करीब 26 सौ करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली 141 किलोमीटर लंबी जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नौ मई 2015 को दंतेवाड़ा में हुुई जनसभा में एमओयू हुआ था। इस रेललाइन के लिए भूमिपूजन पिछले साल 28 सितंबर 2018 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री राजेन्द्र गोहिल ने यहां लालबाग मैदान में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की मौजूदगी में हुई जनसभा में किया था। एमओयू के चार साल पूरे होने के बाद भी अभी तक रेललाइन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है जबकि प्रोजेक्ट को पूरा करने अप्रैल 2022 तक की समयसीमा तय की गई है। रेलवे बोर्ड इस बारे में समीक्षा बैठक में अफसरों से प्रोजेक्ट के काम में देरी को लेकर सीधा सवाल-जवाब कर सकता है।

पहले चरण का काम तेज रेल विकास निगम करा रहा निर्माण

235 किलोमीटर लंबी जगदलपुर-रावघाट-दल्लीराजहरा रेललाइन प्रोजेक्ट के लिए दिसंबर 2007 में एमओयू हुआ था। इस एमओयू में पहले चरण में रावघाट से दल्लीराजहरा तक 95 किलोमीटर की रेललाइन का निर्माण दिसंबर 2012 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। पहले चरण में बिछाई जाने वाली रेललाइन के लिए काम रेलवे विकास निगम को सौंपा गया है। एमओयूू के अनुसार 2012 में रावघाट-दल्लीराजहरा रेललाइन का काम पूरा करके दूसरे चरण में जगदलपुर-रावघाट का काम शुरू करना था। हकीकत यह कि पहले चरण का काम ही सात साल पिछड़ चुका है। काम में हो रही देरी को देखते हुए दूसरे चरण में प्रस्तावित जगदलपुर-रावघाट रेललाइन को दिसंबर 2007 में हुए एमओयू से बाहर कर दंतेवाड़ा में नौ मई 2015 को सेल, एनएमडीसी, सीएमडीसी और इरकॉन के बीच नए एमओयू में दस्तखत किए गए ताकि दोनों चरणों का काम एक साथ तेजी से हो सके। निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए पहले चरण का काम कर रहे रेलवे विकास निगम को दूसरे चरण के काम से अलग कर इस चरण का काम इरकॉन को सौंपा गया है। इसके लिए बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड के नाम से नई कंपनी भी बनाई गई है।

'रेलवे बोर्ड द्वारा देश भर की रेल परियोजनाओं के काम की प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई है। इसमें जगदलपुर-रावघाट-दल्लीराजहरा रेललाइन प्रोजेक्ट भी शामिल है। समीक्षा बैठक में बीआरपीएल और इरकॉन के अधिकारी शामिल होंगे।'

-वीएस प्रभाकर, सीईओ बस्तर रेलवे प्रायवेट लिमिटेड