जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

अपने बेबाक बयानों की वजह से सुर्खियों में रहने वाले प्रदेश के आबकारी और उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा है कि मेरे बयान का मतलब कोई कुछ भी निकाले, हकीकत यही है कि जिसमें व्यवस्था से लड़ने की ताकत होगी वही नेतृत्व करेगा। दंतेवाड़ा उपचुनाव में प्रचार के लिए बस्तर पहुंचे मंत्री लखमा ने नईदुनिया से चर्चा में कहा कि उनके बयान को बेवजह तूल दिया जा रहा है। स्कूली बच्चों के कार्यक्रम में ताकतवर से लड़ने का माद्दा रखने की बात कही थी, इसके लिए उपमा के तौर पर कलेक्टर-एसपी के पदनाम का उपयोग किया था। इसका मतलब यह नहीं है कि कलेक्टर एसपी का कालर पकड़ना ही योग्यता की पहचान है। इसका सही अर्थ यह है कि जो व्यवस्था चला रहे हैं उनके सामने सीना तानकर जो लड़ पाएगा वही नेता होगा। बच्चे मेरी बोलने की शैली से खुश होते हैं इसीलिए उस बात को इस ढंग से कहा। मैं खुद सलवा जुड़ूम से लेकर आज तक व्यवस्था से लड़ता चला आ रहा हूं। विपक्ष में थे तो हर तरह की प्रताड़ना मिली, यहां तक कि सरकार में बैठे लोगों ने मुझपर नक्सली होने तक का आरोप लगाया। अगर मैं डरकर बैठ जाता तो आज मंत्री नहीं होता। यह जनता का मुझपर भरोसा ही है जो मुझे लगातार अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिल रहा है। सरकार में जिम्मेदार पद पर बैठा हूं। मैं जानता हूं कि आईएएस, आईपीएस अफसरों का क्या महत्व है। उनके बिना व्यवस्था नहीं चल सकती। हमारे कई अफसर दिनरात लोगों की सेवा में जुटे हैं। मै। उनकी प्रशंसा करता हूं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो जनता की न सुनकर मनमानी करते हैं। कई बार इसी वजह से जनता सड़कों पर उतर आती है। अगर अफसर लोगों की नहीं सुनेंगे तो हक के लिए लड़ना तो पड़ेगा ही। जो लड़ता है वही नेता बनता है। यही मैंने कहा था। इसमें गलत क्या था। मैंने किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेकर उसका कालर पकड़ने को तो नहीं कहा था। इस मुद्दे को इसलिए तूल दिया जा रहा है क्योंकि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है। लेकिन वे जान लें कि जनता सब समझती है। बस्तर के एक छोटे से गांव से निकलकर मैं उनके बराबर खड़ा हो गया यह वे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। मुझे उनकी परवाह नहीं है। छत्तीसगढ़ में अब पुरानी सरकार नहीं रही जिसे नौकशाही हांकती थी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में पहली बार गरीबों आदिवासियों की सुध लेने वाली सरकार है यह विरोधियों को समझ जाना चाहिए। वे कुछ भी कहते रहें मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमने संकल्प लिया है कि आम जनता के हक के लिए काम करेंगे। हमें कोई रोक नहीं सकता। ज्ञात हो कि लखमा ने स्कूल के एक कार्यक्रम में कहा था कि नेता बनना है तो कलेक्टर और एसपी का कालर पकड़ो। उनका यह वीडियो वायरल हुआ तो प्रदेश की राजनीति गरमा गई।

दस दिन दंतेवाड़ा में-

दंतेवाड़ा उपचुनाव में प्रचार के लिए लखमा दस दिन तक दंतेवाड़ा में रहेंगे। उन्होंने कहा कि उपचुनाव में हमारी विजय पक्की है। इसके बाद चित्रकोट उपचुनाव की घोषणा भी हो जाएगी। लखमा चित्रकोट में भी प्रचार की कमान संभालेंगे। वे अगले करीब एक महीने बस्तर में ही गुजारेंगे।