जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी अभिलाषी जिलों में शामिल बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों ने मिलकर इस साल एक ऐसा रिकार्ड बना डाला है कि कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं हैं। यह रिकार्ड शून्य से पांच साल आयु वर्ग के बच्चों में कुपोषण की सर्वाधिक दर को लेकर बना है। 28 अगस्त को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी जिलावार कुपोषण की दर के मामले में प्रदेश के 27 जिलों में बस्तर संभाग के सभी सातों जिलों का स्थान सर्वाधिक कुपोषण दर रखने के मामले में पहले सात स्थानों पर है। 45.12 फीसदी कुपोषण की दर के साथ प्रदेश सरकार में बस्तर संभाग के इकलौते मंत्री कवासी लखमा का गृह जिला सुकमा प्रदेश में पहले नंबर पर है। दूसरा स्थान बीजापुर जिले को मिला है जहां अप्रैल 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र सरकार की स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी आयुष्मान भारत योजना की लाचिंग की थी। बीजापुर जिले में स्वास्थ्य सेवा बेहतर बनाने के लिए हाल में सम्मान से नवाजे गए वहां के तत्कालीन और वर्तमान में बस्तर कलेक्टर डॉ अ्रयाज तंबोली का प्रयास भी नक्सल प्रभावित इस जिले के नौनिहालों की सेहत नहीं सुधार पाया। यहां के 38.50 फीसद बच्चे कुपोषित मिले हैं। प्रदेश में तीसरा स्थान 36.72 फीसद कुपोषण दर के साथ कोंडागांव को मिला है। जहां की पूर्व माहिला विधायक लता उसेंडी दस साल प्रदेश की महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री रही हैं। चौथा स्थान 34.85 फीसदी के साथ दंतेवाड़ा, पांचवां स्थान 34.60 फीसद के साथ बस्तर, छठवां स्थान 31.70 फीसद के साथ नारायणपुर और सातवें स्थान पर 27.09 फीसद दर के साथ कांकेर जिले ने स्थान बनाया है। उल्लेखनीय है कि अभिलाषी जिलों में काम करने तय की गई प्राथमिकताओं में कुपोषण से निपटना पहले स्थान पर है।

औसत कुपोषण दर राज्य दर से 12 फीसद अधिक

बस्तर संभाग के शून्य से पांच साल आयु वर्ग के बच्चों की औसत कुपोषण दर प्रदेश की औसत कुपोषण दर से 12 फीसद अधिक है। प्रदेश में कुपोषण की दर 23.37 फीसद है जबकि बस्तर संभाग की दर 35.51 फीसद है। महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कुपोषण की सर्वाधिक दर को लेकर चर्चा का प्रयास किया गया पर आधिकारिक बयान देने को कोई राजी नहीं था। अनाधिकृत बयान में अफसरों का कहना है कि यह भी देखा जाना चाहिए कि एक दशक पहले बस्तर में कुपोषण की स्थिति क्या थी? दस सालों में दस फीसद से अधिक कमी क्या कम है?

क्या है वजन-त्योहार

महिला एवं बाल विकास विभाग हर साल आंगनबाड़ियों के बच्चों का वजन दर्ज करने वजन त्योहार मनाता है। इस साल फरवरी में पूरे प्रदेश में वजन त्योहार आयोजित किया गया जिसमें शून्य से पांच साल आयु वर्ग के बच्चों का वजन लिया गया था। वजन के आधार पर कुपोषण की दर निकाली गई है। जिसकी फायनल रिपोर्ट राज्य शासन ने अभी जारी की है। कुपोषण की दर कम करने चलाए जा रहे सुपोषण अभियान के लिए भी बस्तर संभाग की मौजूदा स्थिति किसी चुनौती से कम नहीं है।

कुपोषण की दर चिंताजनक है। इस क्षेत्र में काफी काम करना है। पहले की तुलना में भले की कुपोषण की दर में कमी आई है लेकिन आगे सुपोषण अभियान को लेकर जो उद्देश्य तय किए गए हैं उसे मेहनत करके सभी विभागों को सामंजस्य और सामुदायिक सहभागिता के साथ पूरा करना होगा।

-अमृत खलको, संभागायुक्त बस्तर