जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की दूसरी प्रमुख पूजा विधान डेरी गड़ाई बुधवार सुबह सिरहासार भवन में संपन्न हुई। इस अवसर पर बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष व सांसद दीपक बैज ने कहा कि दशहरा मनाने के लिए प्रदेश सरकार से 55 लाख रुपए की मांग की गई है। यह दशहरा बीते वर्षों की तरह उधारी के सामानों से नहीं मनाया जाएगा। नगदी खरीदी के साथ हम दशहरा मनाने वचनबद्ध हैं।

बस्तर दशहरा पर्व 2019 की पहली रस्म गत एक अगस्त को हरियाली अमावस्या के दिन पाठजात्रा के रूप में संपन्न हो चुकी है। दूसरी रस्म डेरी गड़ाई पूजा विधान बुधवार को सिरहासार भवन में सुबह सवा 11 बजे प्रारंभ हुई। दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी कृष्णकुमार पाढ़ी और सहायक पुजारी उदयचंद्र पाणिग्राही ने पूजा विधान संपन्न कराया। इस दौरान भवन के अंदर दो काष्ठ स्तंभ खड़े किए गए। इस प्रक्रिया के पहले यहां खोदे गए गड्ढों में 11 मांगुर मछलियां और अंडे, लाई- चना आदि रखे गए। इस पूजा विधान के संदर्भ में प्रधान पुजारी ने बताया कि शनिवार को पितृपक्ष प्रारंभ हो रहा है। हिंदू शास्त्र के अनुसार पितृपक्ष में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता इसलिए बुधवार को डेरी गड़ाई पूजा विधान संपन्न कराया गया है। इधर टेम्पल कमेटी के सचिव व जगदलपुर तहसीलदार सुंदरलाल धृतलहरे ने बताया कि डेरी गड़ाई रस्म पूरी हो चुकी है। अब दशहरा रथ बनाने के लिए लकड़ियां लाई जाएगी। इस कार्य के लिए फिलहाल 17 ट्रकों की व्यवस्था कर दी गई है। बस्तर वनमंडल के माचकोट, दरभा, जगदलपुर बकावंड आदि वन परिक्षेत्रों से साल की लकडिय़ां लाई जा रहीं है। डेरी गड़ाई पूजा विधान के मौके पर बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष व बारसूर परगना के मांझी अर्जुन कर्मा के अलावा बड़ी संख्या में मांझी, चालकी, मेंबर मेंबरीन, बस्तर दशहरा समिति और टेंपल कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। इस मौके पर मेंबर मेंबरीनों ने हल्दी खेलकर खुशियां मनाई। बताया गया कि बस्तर दशहरा की तीसरी महत्वपूर्ण रस्म काछनगादी आगामी 28 सितंबर शनिवार शाम छह बजे भंगाराम चौक स्थित काछन देवी मंदिर में संपन्न होगी। इस दिन बस्तर राज परिवार कांटे के झूले में सवार काछन देवी से दशहरा मनाने की अनुमति मांगेंगे।