जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मुख्य वन संरक्षक कार्यालय परिसर में निर्मित शहीद स्मारक में बुधवार सुबह जंगलों की सुरक्षा करते शहीद हुए अपने सहकर्मियों की शहादत को याद करते 14 वां वनकर्मी शहादत दिवस मनाया। इस मौके पर विभिन्न वारदातों में शहीद हुए सात वन कर्मियों को श्रद्धांजलि दी गई। सभा में शहीद वन कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्य वन संरक्षक मोहम्मद शाहिद ने कहा कि आज पूरी दुनिया में जंगलों को बचाने का अभियान जारी है। हमें गर्व है कि साथियों ने प्रदेश में जंगलों की रक्षा करते हुए अपनी शहादत दी है। बदलते पर्यावरण को वन ही बचा सकते है। और इसके लिए जनभागीदारी भी बहुत जरूरी है। उन्होंने सुझाव रखा कि वनों को बचाने वाले शहीदों का नाम शहीद स्मारक में उल्लेखित होना चाहिए।

अफसर-कर्मी जुटे दी श्रद्धांजलि

बुधवार सुबह 11 बजे स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत पुष्पांजलि से हुई। इस अवसर पर प्रभारी वनमंडल शेखर स्वरूप व श्रीमती दीव्या गौतम एसडीओ कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के साथ अन्य अफसरों और वनकर्मियों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर वन कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष सलीम खान ने कहा कि शहीद सहकर्मियों के नामों का उल्लेख एक महीने के भीतर स्मारक में कर दिया जाएगा। सभा में जगदलपुर, माचकोट, बस्तर, बकावंड, करपावंड, भानपुरी, चित्रकोट, दरभा, कोलेंग, कोटमसर वन परिक्षेत्र के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

1993 में हुई थी पहली शहादत

प्रदेश में जंगल की सुरक्षा करते पहली शहादत 1993 में हुई थी। ये शहादतें नक्सल और वन तस्करों के हमलों व अन्य घटनाओं में हुई हैं। तबसे लेकर आज तक

रामेश्वर पांडेय वनरक्षक सुकमा, हरिबंधु वनपाल सुकमा, जगदीश चंद मरकाम वनरक्षक सुकमा, व्हीपी शास्त्री वनपाल बीजापुर, अगनपल्ली पांडु वनपाल बीजापुर, सीताराम तिवारी उपवनक्षेत्रपाल मनेंद्रगढ़ और दौलतराम लदेर वनक्षेत्रपाल लैलूंगा। इनमें से तीन वनकर्मियों की हत्या नक्सलियों ने किरंदुल-पालनार मार्ग पर, एक की हत्या अपहरण कर बोदागुडा दोरनापाल में, एक वनपाल की हत्या वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान केतुलनार बीजापुर में बस में विस्फोट से, एक डिप्टी रेंजर की मौत केल्हारी के जंगल में गश्त के दौरान दंतेल हाथी के द्वारा कुचलने से, वहीं वन क्षेत्रपाल की हत्या वनोपज के साथ खनिज संपदा पकड़ने पर तस्करों ने लैलूंगा में की थी।