जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

दीपावली के आते ही लोग अपने घरों के साफ-सफाई और रंगाई पुताई में लग गए हैं। इन सबके बीच जहां चूना, डिस्टेंपर और पेंट की कीमत में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है वहीं रंगाई- पुताई की मजदूरी अधिक होने से लोगों को घर पुताई काफी महंगा पड़ रहा है। अगर कोई व्यक्ति 10 हजार रुपये का पेंट सामान ले जा रहा है तो उसे पुताई खर्च 11 हजार रुपये से अधिक करना पड़ रहा है। पेंटर और मजदूरों का टोटा है। इन दिनों शहर के हार्डवेयर दुकानों में चूना, डिस्टेंपर तथा विभिन्न प्रकार के पेंट खरीदने वालों की खासी भीड़ नजर आ रही है। बताया गया कि इस वर्ष उपरोक्त सामानों की कीमत में वृद्धि नहीं हुई है, इसलिए लोग अपनी पसंद का रंग पेंट आदि खरीद रहे हैं। मनोज हार्डवेयर के संचालक उदाराम मूलचंदानी बताते हैं कि चूना से लेकर विभिन्न प्रकार के पेंट की कीमत में इस साल कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है, उल्टे यह सामान सस्ते हुए हैं। उन्होंने बताया कि पहले उपरोक्त सामानों पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगता था परन्तु अब इसे घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। इस कारण लोगों पर आर्थिक बोझ नहीं बढ़ा है।

महंगा पड़ रहा पुताई करवाना

लोग अपने घरों की रंगाई- पुताई के लिए चूना से लेकर पेंट तक खरीद रहे हैं परंतु उन्हें पेंटर नहीं मिल रहे हैं। जो पेंटर मिल रहे हैं, उनकी मजदूरी दर सुनकर लोगों के हौसले पस्त हो रहे हैं। सामान्य चूना पोतने वाले मजदूर जहां 300 से लेकर 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी मांग रहे हैं वहीं पेंट करने वाले एक वर्ग फीट दीवार पर पुट्टी लगाने का छह रुपये और पेंट करने दो रुपये प्रति फीट ले रहे हैं। शहर में पेंट तथा पुताई करने पहुंचे बम्हनी, मारकेल, कोपागुड़ा के रूटू, जीवनलाल, सुखचंद कश्यप, रामचंद्र, जग्गू आदि बताते हैं कि इन दिनों चूना पुताई मजदूरी साढ़े तीन सौ तक है। वहीं पेंट- पुट्टी करने की दर दो से छह रुपये तक है। ऊंची दीवारों पर चढ़कर पुताई करना जोखिम भरा होता है। बावजूद इसके लोग मोल-भाव करते हैं। पुताई के लिए सीढ़ी- रस्सा आदि वे ही लेकर आते हैं। पुताई कार्य जोखिम भरा होता है इसलिए अधिकांश युवक इस व्यवसाय को अपनाना नहीं चाहते। इसके चलते ही लोगों को अपने घरों के पुताई के लिए समय पर मजदूर या पेंटर नहीं मिल रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network