जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जनपद पंचायत व्यवस्था वर्ष 1962 से जारी है लेकिन इस विभाग में काम करने वाले मूल कर्मचारियों को 57 वर्षों बाद भी शासन की विभिन्न सुविधाओं का लाभ तो दूर संविलियन तक का लाभ नहीं मिल पाया है। जिला और जनपद पंचायतों में काम करने वाले कई ऐसे कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और कई कर्मचारियों का निधन भी हो चुका है। इस संबंध में छग जिला-जनपद पंचायत कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

छत्तीसगढ़ जिला-जनपद पंचायत कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष नंदलाल साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के सभी 27 जिलों के जिला व जनपद कार्यालयों में कुल 846 मूल लिपिक व भृत्य हैं। इन्हीं कार्यालयों में पदस्थ विकासखंड कर्मचारियों को शासन की सभी सुविधाएं मिल रही हैं परंतु जिला और जनपद कार्यालयों के मूल कर्मचारियों को पेंशन, स्वास्थ्य, आवासीय सुविधा, सातवां वेतनमान का एरियर्स नहीं मिलता। संघ लंबे समय से जिला-जनपद पंचायत कर्मचारियों के संविलियन की मांग कर रहा है परंतु छत्तीसगढ़ प्रदेश की सरकारें इस दिशा में उदासीन हैं। बताया गया कि जनपद पंचायत द्वारा ही शिक्षाकर्मियों व आयुर्वेद चिकित्सा की भर्ती की गई और इन सभी का संविलियन कर दिया गया है। इतना ही नहीं मत्स्य विभाग में कार्यरत ऐसे ही संवर्ग के कर्मचारियों को भी संविलियन का लाभ मिल चुका हैं परंतु प्रदेश के जिला व जनपद पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों को संविलियन का लाभ नहीं दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बनाए गए पंचायत भर्ती नियम 1999 में किए गए प्रावधान अनुसार जिला एवं जनपद पंचायतों में कर्मचारियों की नियुक्ति गठित समिति के माध्यम से किया जाता है। छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 131 में जिला- जनपद पंचायतों के कर्मचारियों को वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवानिवृत्ति के पश्चात लाभ दिए जाने का प्रावधान उल्लेखित है, किंतु शासन स्तर से आदेश नहीं होने के कारण जिला व जनपद पंचायत के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network