जगदलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

चित्रकोट विधानसभा उपचुनाव में लोहंडीगुड़ा एवं तोकापाल क्षेत्र में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा टाटा स्टील प्लांट के लिए ली गई जमीन किसानों को वापस करना था। विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे चारो राजनीतिक दलों कांग्रेस, भाजपा, सीपीआई और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने इसे अपने-अपने तरीके से मुद्दा बनाया था। सोमवार को हुए चुनाव में टाटा प्रभावित रहे गांवों में एक बार फिर वोटों की बारिश हुई है। मतदाता किस दल और प्रत्याशी पर मेहरबान रहे हैं इसका खुलासा 24 अक्टूबर को मतगणना का परिणाम आने के बाद पता चलेगा पर दल और प्रत्याशी रिकार्ड मतदान को लेकर अभी से कयास लगाने में जुट गए हैं। पिछले एक साल के भीतर हुए दो आम चुनावों विधानसभा चुनाव 2018 और लोकसभा चुनाव 2019 में यहां के दस प्रभावित गांवों में औसत अस्सी फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। सोमवार को हुए उपचुनाव में भी शाम पांच बजे तक करीब अस्सी फीसदी मतदान होने की खबर थी। यह आंकड़ा अंतिम गणना में बढ़ भी सकता है। नईदुनिया ने मतदान का जायजा लेने टाकरागुड़ा, बेलर, बडांजी आदि आधा दर्जन गांवों का भ्रमण करने के बाद पाया कि यहां अभी भी टाटा की जमीन वापसी ही सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। मतदाताओं ने भी इसी आधार पर मतदान किया है।

जमीन वापसी बड़ा मुद्दा रिकार्ड मतदान का कारण भी

टाटा स्टील प्लांट के लिए बड़े धाराऊर, धुरागांव, बड़ेपरोदा, बेलर, टाकरागुड़ा, बडांजी, छिंदगांव, कुम्हली, सिरिसगुड़ा और परोदा दस गांवों की 1707 किसानों की करीब साढ़े चार हजार एकड़ जमीन राज्य शासन द्वारा 2008 में ली गई थी। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद किसानों को उनकी जमीनें वापस कर दी गई और पहले बांटा गया करीब 42 करोड़ रूपये का मुआवजा भी किसानों के पास छोड़ दिया गया। चुनाव आयोग के रिकार्ड के अनुसार 2013 के विधानसभा चुनाव के पहले तक यहां औसत 50 से 60 फीसदी वोट पड़ते थे पर जमीन का मुद्दा गरमाने के बाद अस्सी फीसदी तक वोटिंग होने लगी है। इस बार उपचुनाव में भी जमकर वोटों की बारिश हुई है।

कांग्रेस को दोगुने से अधिक वोट मिल रहे हैं

विधानसभा चुनाव 2018 के समय कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में टाटा के लिए अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस करने का वादा किया था जिसका खासा असर देखा गया। उस चुनाव में कांग्रेस को करीब 54 फीसद, भाजपा को 24 और सीपीआई को 15 फीसद वोट मिले थे। इसके छह माह बाद हुए लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस ने अपना वोट बैंक सुरक्षति रखते हुए 53.3 फीसद, भाजपा ने 23.2 फीसद और सीपीआई ने 14 फीसद वोट पाए थे। इस बार भी जैसा माहौल और उत्साह मतदाताओं में देखने को मिल रहा है उसे कांग्रेस अपने पक्ष में बता रही है।

उपचुनाव में सभी दलों का मुद्दा रही जमीन

उपचुनाव लड़ रहे सभी चारों दलों द्वारा टाटा प्रभावित रही जमीन को जोर शोर से चुनावी मुद्दा बनाया गया। चुनाव में कांग्रेस ने जमीन वापसी को एतिहासिक कदम बताकर वोट मांगा था। भाजपा का कहना था उसने जमीन अधिग्रहित की जरूर थी पर किसानों के विरोध को देखते हुए जमीन छीनी नहीं बल्कि चौथी बार सरकार बनने पर जमीन वापस करने का मन बना लिया गया था, लेकिन जनता ने सत्ता पलट दी। सीपीआई का दावा रहा कि टाटा का विरोध सिर्फ उसी के द्वारा किया गया। कांग्रेस और भाजपा दोनों दल किसानों की जमीन छीनने में लगे थे। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने चुनावों में जमीन को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों पर भूल करने का आरोप मढ़ते हुए कहा कि जल्दबाजी में जमीन वापस करने का फैसला बस्तर के औद्योगिकीकरण पर भारी पड़ गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network