भरत भारद्वाज

फरसगांव। नईदुनिया

कोण्डागांव जिले के नेशनल हाइवे-30 से लगे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मसोरा में एक अनोखी पहल देखने को मिली है। जहां बच्चों में पढ़ाई की ललक देखकर अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाती है। सुबह आठ बजे से स्कूल खुलता है और शाम पांच बजे तक पढ़ाई होती है। स्कूल में नौ घंटे पढ़ाई के साथ ही शनिवार-रविवार को भी छुट्टी नहीं होती और ना ही हाफ डे होता, यहां बच्चे खाने के लिए दो टिफिन लेकर आते हैं। पढ़ने में मोबाइल फोन का भी सहयोग लेते हैं।

विद्यालय के प्राचार्य शिवलाल शर्मा ने बताया कि स्कूल में 121 बालक, 150 बालिकाएं कुल 271 बच्चे पढ़ते हैं। ग्रामीण अंचल होने के कारण बच्चे जैसे ही स्कूल से घर जाते हैं, तो वे पढ़ाई नही कर पाते व उनको कुछ न कुछ घर या खेत का काम करना पड़ता है, जिससे इनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। पूरे शिक्षक व शिक्षिकाओं ने एक मीटिंग रखी थी जिसमें बच्चों की पढ़ाई व शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जो स्कूल 10 से चार बजे तक लगता है सबसे पहले उसका समय बढ़ाकर आठ से पांच बजे तक किया गया। इसके बाद बच्चों की सहमति से पालकों को बुलाकर उनकी राय ली गई। सभी सहमत हुए। तब से दो माह के लिए सुबह आठ से शाम पांच बजे तक नौ घंटे पढ़ाना शुरू किए। पढ़ाई की नई पहल को लेकर सभी बच्चे व उनके पालक बहुत खुश हैं।

दो टिफिन लेकर आते हैं बच्चे

पेरेंट्स मीटिंग में प्राचार्य ने कहा कि जब सभी बच्चे नौ घंटे स्कूल में रहकर पढ़ाई करेंगे तो भूख भी लगेगी उनके भोजन आदि के लिए परिवार वालों को बच्चों का सहयोग करना होगा, तब से सभी बच्चे दो टिफिन लेकर स्कूल आते हैं या फिर उनके परिवार वाले दूसरा टिफिन छोड़ने स्कूल आते हैं। आस पास के लोग इस स्कूल को टिफिन वाला स्कूल भी बोलते हैं।

सुबह पांच बजे उठकर फोन पर लेते हैं होमवर्क

पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिये शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मसोरा में जो विशेष पहल की गई है, इसमे बालक बालिकाओ में काफी उत्साह है। स्कूल में पढ़ाई के बाद होमवर्क मिलता है। उसे तो करते ही हैं व कुछ बच्चे सुबह पांच बजे उठकर फोन करके टीचर्स से होमवर्क लेते है जिनका स्कूल में प्रतिदिन टेस्ट भी होता है।

एक दिन में पढ़ाये जाते है सिर्फ दो विषय

चर्चा करते हुए प्राचार्य ने बताया कि कुछ बच्चे गणित में कमजोर थे, सभी बच्चों को 20 दिन तक सिर्फ और सिर्फ गणित पढ़ाया गया है, एक दिन में जितने भी पीरियड होते है उन सभी में अलग अलग विषय ना पढ़ाकर सिर्फ गणित पढ़ाया गया और जो आर्ट्स वाले बच्चे है उनको एक दिन में सिर्फ दो ही विषय पढ़ाये जाते है, ताकि उनको अच्छे से समझ में आये।

टेलेंटेड सात विद्यार्थियों को पढ़ाने किया प्रेरित

प्रधान प्राचार्य ने बताया कि हमारे स्कूल में सात ऐसे बालक-बालिकाएं हैं जो एक दिन ट्यूशन पढ़ने की बात को लेकर मेरे पास आये, तब मैंने कहा कि ट्यूशन की कोई फीस नही लगेगी, लेकिन आप लोगो को मुझसे पढ़कर अपने अपने पारा मोहल्ला व गांव में जाकर जो भी समय मिलेगा फ्री में अन्य बच्चों को जो भी पढ़ने के इच्छुक हैं, उनको पढ़ाना पड़ेगा। तब से सभी बच्चे अपने-अपने मोहल्ला व गांव में पढ़ाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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