जगदलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

बस्तर विश्वविद्यालय का नाम झीरम हमले में जान गंवाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा के नाम पर रखने को कार्य परिषद ने मंजूरी दे दी है। दो दर्जन से अधिक विषयों को स्वीकृति दी गई है। वहीं 10 अशैक्षणिक पदों पर भर्ती के साथ एमएसीए विभाग में संविदा एक्सटेंशन पर फिलहाल पेंच फंस गया है।

शुक्रवार को दोपहर करीब साढ़े बारह बजे विश्वविद्यालय के अकादमिक भवन में कार्य परिषद की बैठक शुरू हुई। बैठक में बस्तर टाइगर के नाम से चर्चित रहे महेंद्र कर्मा के नाम पर बस्तर विश्वविद्यालय का नामकरण करने को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। बैठक में मौजूद कार्य परिषद के सदस्य व जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन ने कहा कि स्व महेंद्र कर्मा ने बस्तर व प्रदेश की राजनीति में जो योगदान दिया है, उसके मद्देनजर उनके नाम पर विश्वविद्यालय का नामकरण करना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बैठक में दो दर्जन से अधिक वित्तीय व शैक्षणिक मामलों को मंजूर किया गया। वहीं 10 शैक्षणिक पदों पर हो रही भर्ती को फिलहाल रोकने पर सहमति बनी।

विधायक जैन ने कहा कि बस्तर के स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता देने के इस मामले में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इस मामले की शिकायत राज्य सरकार व कुलाधिपति से की गई है, जिसका फिलहाल जवाब नहीं आया है। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2018 में 10 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। 2019 में विभिन्न चुनावों के दौरान लगी आचार संहिता के कारण भर्ती अवरूद्ध होती रही है। दूसरी ओर लिखित परीक्षा में बस्तर के बाहर के अभ्यर्थियों के बैठने को आधार बनाकर इस मामले की शिकायत की गई है। विश्वविद्यालय के एमसीए विभाग के दो संविदा प्राध्यापकों को पुनः एक वर्ष की संविदा देने के विषय पर भी फैसला नहीं हो सका। कार्य परिषद के सदस्यों ने इस मामले में शासन के आदेश की कापी प्रस्तुत करने कहा है।

कनिष्ठ चयन बोर्ड से मांगेंगे सुझाव

कार्य परिषद की बैठक में विवि में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भर्ती में प्राथमिकता देने कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड से सुझाव मांगने के प्रस्ताव को स्वीकृत किया गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन बोर्ड से यह सुझाव मांगेगा कि उनके दैवेभो कर्मचारियों को बोर्ड भर्ती में प्राथमिकता देगा या नहीं? उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में कई ऐसे कर्मचारी हैं जो 45 साल की आयु पूर्ण करने वाले हैं। एक ओर विश्वविद्यालय उनकी मांगों पर विशेष रूचि नहीं ले रहा है तो दूसरी ओर उनकी उम्र बढ़ती जा रही है। इनमें से कई कर्मचारी विश्वविद्यालय की स्थापना के समय से दैवेभो के तौर पर काम कर रहे हैं।

घाटे का बजट पारित किया गया

कुलपति प्रो एसके सिंह ने कार्य परिषद के समक्ष बस्तर विश्वविद्यालय के वर्ष 2019-20 पुनरीक्षित बजट अनुमान के साथ वर्ष 2020-21 का बजट अनुमान प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय ने घाटे का बजट पेश किया है। चालू वित्तीय वर्ष में 4270.53 लाख के आय के विरूद्ध 4366.69 व्यय का अनुमानित बजट पेश किया गया। कार्य परिषद ने बजट को मंजूरी दी है। कुलसचिव डा वीके पाठक ने बताया कि विश्वविद्यालय के लिए स्वीकृत पदों पर शत-प्रतिशत भर्ती की योजना है। विश्वविद्यालय में सभी पाठ्यक्रमों की पीजी क्लासेस शुरू करने की योजना भी बनाई गई है। बैठक में कार्य परिषद के करीब दस सदस्य उपस्थित रहे। पांच विधायकों में से केवल जगदलपुर विधायक ही बैठक में आए थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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