योगेंद्र ठाकुर

दंतेवाड़ा (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

कोरोना वायरस ने लोगों को घरों में कैद कर रखा है। इस वायरस से खुद और समाज को बचाने लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया है। वनों पर आश्रित बस्तर के आदिवासियों ने जंगल जाना बंद कर दिया है। इससे आखेट भी थम गया है। जिसे आदिम संस्कृति का नाम देकर आज तक पुलिस व वन विभाग नहीं रोक सके उस परंपरा को कोरोना ने थाम लिया है। आमतौर पर ग्रामीण इन दिनों आमा पंडूम से लेकर आखेट और मेले-मड़ई में मस्त रहते थे।

कोरोना वायरस के संभावित प्रसार को रोकने सरकार ने लॉकडाउन कर दिया है। शहर हो या गांव सभी जगह कोरोना जागरूकता के चलते नाकाबंदी है। लोग घरों में दुबककर सुरक्षति रहना चाहते हैं। इसके प्रभाव से बस्तर का वनांचल भी अछूता नहीं है। आदिवासी युवा ग्रामीणों को कोरोना से बचने जागरूक कर रहे हैं। आदिवासी समाज के बल्लू भोगामी और सुरेश कर्मा के मुताबिक कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव के बारे में गांव-गांव में जागरूकता फैला रहे हैं। बता रहे हैं कि भीड़ की बजाए शारीरिक दूरी में रहें। पंडुम और अन्य तीज-त्यौहारों को स्थगित कर दिया गया है। जरूरी होने पर गायता-वड्डे द्वारा अकेले ही देवगुड़ी में पूजा संपन्न हो रही है।

पारद और परंपरा पर लगी रोक

ग्रामीणों को सामूहिक पूजा में हिस्सा लेने से मनाही है। इस सीजन में ग्रामीण सामूहिक रूप से आखेट (शिकार) खेलने जंगल जाते हैं, जहां खरगोश या छोटे जीव और परिंदों का शिकार पर्व मनाया जाता है। इसे भी कोरोना के चलते तिलांजलि दे दी गई है। शिकार की औपचारिकता निभाने और पूजा के लिए जरूरी जड़ी-बूटी लाने एक-दो व्यक्ति जंगल जा रहे हैं। इसके लिए भी पंचायत और प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी है। देवगुड़ी में पूजा के बाद गायता-वड्डे प्रसाद ग्रामीणों के घर पहुंचाकर आशीर्वाद दे रहे हैं। यहां बताना लाजिमी होगा कि पारद या आखेट आदिवासी समाज का प्रमुख अंग है। मानसून के पूर्व चैत्र माह से यह उत्सव शुरू होता है। ग्रामीणों का समूह ढोल-नगाड़ों के साथ जंगल में शिकार कर वनभोज करता है। यह प्रथा पीढिय़ों से चली आ रही है।

शादी- ब्याह और मेले हुए स्थगित

कोरोना से बचने शादी-ब्याह और मेले स्थगित कर दिए गए हैं। पिछले दिनों गढ़मरी में एक बच्चे की छठी कार्यक्रम को तहसीलदार के समझाइश पर ग्रामीणों ने नहीं किया। ग्राम बड़ेकरका का विवाह कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया जबकि पूरी तैयारी हो चुकी थी। बड़ेकरका के गुड्डीराम के पुत्र ईश्वर का विवाह चेरपाल के बोडाराम अटामी की पुत्री बुधरी से 26 मार्च को होना था। कार्ड छपकर बंट चुके थे लेकिन लॉकडाउन में दोनों पक्षों ने परिस्थितियां सामान्य होने तक विवाह कार्यक्रम को स्थगित कर दिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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