विनोद सिंह, जगदलपुर (नईदुनिया)। उन्‍नीस साल पहले रेल जोन के बंटवारे में न्याय नहीं होने के कारण बस्तर को बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। वनोपज और खनिज संपदा से समृद्ध इस धरती के लोगों को इसके चलते आज भी रेल से जुड़ी ऐसी कई सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जो मिलनी चाहिए।

दरअसल, बस्तर से होकर गुजरने वाली 445 किलोमीटर लंबी किरंदुल-कोत्तावालसा (केके) रेललाइन पूर्वी तट रेल जोन भुवनेश्वर में शामिल है। बस्तर का किरंदुल से ओडिशा सीमा पर आमागुड़ा स्टेशन तक का क्षेत्र भी इसी रेललाइन का हिस्सा है। बस्तर क्षेत्र को अब नए प्रस्तावित रेलमंडल रायगढ़ा (ओडिशा) में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। यह मंडल पूर्वी तट रेल जोन भुवनेश्वर के अधीन रहेगा। दूसरी ओर वाल्टेयर रेलमंडल को समाप्त कर इसे दक्षिण तट रेल जोन बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

केके रेललाइन का बस्तर सहित आधा हिस्सा रायगढ़ा और शेष हिस्सा किसी अन्य रेलमंडल में शामिल करने की योजना है। ऐसे में इसे दक्षिण-पूर्व मध्य रेल जोन बिलासपुर में शामिल करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। 17 अक्टूबर को पूर्वी तट रेल जोन भुवनेश्वर के अंतर्गत सांसदों की कमेटी की वाल्टेयर में होने वाली बैठक में बस्तर सांसद दीपक बैज इस विषय को उठाएंगे।

उनका कहना है कि किरंदुल से आमागुड़ा तक के हिस्से को बिलासपुर जोन में शामिल किए बिना बस्तर में रेलवे के विस्तार में तेजी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि बस्तर के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। बता दें कि 21 जून 2012 को तत्कालीन रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी के साथ बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की रेल भवन दिल्ली में हुुई बैठक में इस विषय को पहली बार मुखरता के साथ उठाया गया था।

रावघाट-जगदलपुर रेललाइन बिलासपुर जोन में शामिल

केके रेललाइन जापान के सहयोग से 1966-1967 में बनकर तैयार हुई थी। दंतेवाड़ा के बैलाडीला से लौह अयस्क के परिवहन के लिए इसका निर्माण किया गया था। रायपुर से जोड़ने के लिए प्रस्तावित जगदलपुर-रावघाट-दल्लीराजहरा रेललाइन 235 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व मध्य रेल जोन बिलासपुर के अंतर्गत रायपुर रेलमंडल में शामिल है। यह रेललाइन जगदलपुर में केके रेललाइन से लिंक होगी। इसे देखते हुए ही केके रेललाइन के बस्तर क्षेत्र में आने वाले हिस्से को बिलासपुर जोन में शामिल करने की मांग जोर पकड़ रही है।

Posted By: Pramod Sahu

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