जगदलपुर। नईदुनिया। Jagdalpur news बस्तर में नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है। बीते दो वर्षों में फोर्स ने उन इलाकों तक पहुंच बना ली है जो पहले नक्सलियों के स्वतंत्र इलाके समझे जाते थे। अब यहां नक्सलवाद से अंतिम चरण की लड़ाई चल रही है। बीते सालों में मिली सफलता जाया न हो और जवानों का उत्साह बना रहे इसलिए नक्सल ऑपरेशन की कमान अब भी सीे डीजीपी डीएम अवस्थी थामे हुए हैं।

अवस्थी पिछली सरकार में डीजी नक्सल ऑपरेशन थे, तब वह राजधानी से ज्यादा वक्त बस्तर के जंगलों में गुजारा करते थे। उस वक्त उनकी भेज्जी किस्टाराम जैसे धुर नक्सल इलाकों से तस्वीर आती थी। वह बाइक पर बैठ अंदरूनी गांवों में चले जाया करते थे। अब वह पूर्णकालिक डीजीपी बन गए हैं पर नक्सल समस्या से निपटने की मुहिम में उनका सीधा दखल अब भी दिख रहा है।

डीजीपी बनने के बाद व्यस्तता बढ़ी है, लिहाजा पहले की तरह वह हर हफ्ते तो बस्तर नहीं आ पा रहे पर लगभग हर महीने संभाग के धुर नक्सल प्रभावित जिलों तक उनका दौरा अब भी हो रहा है। सोमवार को वह दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले पहुंचे थे। अफसरों की बैठक लेकर नक्सल अभियान में प्रगति का हाल जाना। आसपास के ग्रामीण इलाकों का जायजा लेने से वह अब भी नहीं चूके। कभी भी फोर्स के किसी कैंप में पहुंच जाते हैं। उनकी इस सक्रियता का सीधा असर नक्सल मोर्चे पर दिखता है।

बीते एक साल में नक्सल घटनाओं में 40 फीसद से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है। पिछले साल नक्सली एक भी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दे पाए जबकि यह साल चुनावों का साल रहा। नईदुनिया से अवस्थी ने कहा- बात यह है कि हम सफलता के रास्ते पर काफी आगे निकल आए हैं। यहां रुकना नहीं है। नक्सल समस्या का पूर्ण समाधान निकाल बस्तर में शांति और विकास की राह खोलना है। इसके लिए जरूरी है कि नक्सलियों पर लगातार दबाव बनाए रखा जाए।

खुफिया तंत्र मजबूत हुआ

डीएम अवस्थी राज्य खुफिया ब्यूरो के प्रमुख भी हैं। नक्सल डीजी रहते हुए उन्होंने एसआईबी को काफी मजबूत किया। इसका नतीजा यह हुआ कि नक्सलियों के बारे में सुदूर गांवों से भी पुख्ता सूचनाएं मिलने लगी हैं। पिछले कुछ महीनों में एसआईबी के इनपुट के आधार पर पुलिस ने कई कुख्यात नक्सलियों को पकड़ा है।

जंगल में कसता फोर्स का शिकंजा

बस्तर में इस साल के शुरुआती दस दिनों में फोर्स के तीन नए कैंप खोले गए हैं। बड़े केरपे, बोदली और करेमेटा। इन कैंपों के खुलने से न सिर्फ सुरक्षा चाक-चौबंद हुई है बल्कि ग्रामीणों में विश्वास की बहाली भी हुई है। सुकमा के पालोड़ी और दंतेवाड़ा के पोटाली जैसी रणनीतिक महत्व की जगहों पर कैंप खुलने से नक्सलियों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा है। अवस्थी ने कहा है कि इस साल अभी और कैंप खुलेंगे।

Posted By: Hemant Upadhyay

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