जगदलपुर। Nawakhani Festival: बस्तर में प्राणदायिनी का दर्जा प्राप्त इंद्रावती नदी में सोने की नाव और चांदी की पतवार अर्पित की गई। जगदलपुर से दस किलोमीटर दूर बस्तर विकासखंड के इंद्रावती तट स्थित ग्राम घाटकवाली के ग्रामीणों ने नाव व पतवार भेंट कर ग्रामदेवी जननी माता से नवाखानी तिहार त्योहार मनाने की अनुमति मांगी।

गांव के पूर्व सरपंच सुकरूराम कश्यप ने बताया पिछले करीब सात सौ सालों से यह परंपरा चली आ रही है। यह हमारी इंद्रावती नदी और देवी देवताओं के प्रति आस्था और विश्वास का प्रतीक है। समय-समय पर इंद्रावती नदी को यहां क्षेत्र के लोग स्वेच्छा से कुछ न कुछ अर्पित करते रहते हैं। सोने की नाव और चांदी की पतवार का अर्पण भी इसी परंपरा का हिस्सा है।

हर साल यहां इस अवसर को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर पुजारी के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी तट पर एकत्र हुए थे। घाट कवाली इंद्रावती नदी के किनारे बसा पुराना गांव है। यह नदी ही यहां के किसानों और ग्रामीणों का जीवन आधार है। नदी के प्रति अपना कर्तव्य तथा आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष भाद्र मास शुक्ल पक्ष तृतीया के दिन यहां के ग्रामीण नाव पतवार भेंट करने जुटते हैं।

ग्राम पुजारी मंगतू राम कश्यप और ग्रामीण गांव की जमींदारीन जलनी माता का छत्र लेकर इंद्रावती किनारे नावघाट में एकत्र हुए। ग्राम पुजारी द्वारा जलनी माता के छत्र की सेवा अर्जी करने के बाद और इंद्रावती को सोने का नाव चांदी का पतवार साठिया धान की बाली लाई चना लांदा गुड़ चिवड़ा अंडा के अलावा सफेद बकरा मुर्गा की भेंट देकर नवाखानी त्यौहार मनाने की अनुमति मांगी।

छह सितंबर को मनाएंगे नवाखानी

धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद पुजारी ने बताया कि देवी ने छह सितंबर को घाट कवाली में नवाखानी तिहार मनाने की अनुमति दी है। घाटजात्रा में ग्राम प्रमुखों के अलावा आसपास के करंजी भाटपाल चोकर कुड़कानार के ग्रामीण भी शामिल रहे। पूर्व सरपंच सुकरु राम कश्यप ने बताया कि यह परंपरा लगभग सात सौ वर्षों से चली आ रही है।

Posted By: Pramod Sahu

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