जगदलपुर। बस्तर संभाग के सबसे बड़े तालाब दलपत सागर के किनारे यहां शहर के मोतीतालाब पारा स्थित मां छिंदवाली महाकाली मंदिर में इस साल भी शारदीय नवरात्र पर 1151 भक्तों ने मिलकर सामूहिक रूप से एक ज्योति कलश जलाया है। तेल की बर्बादी व प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए इस मंदिर में बीते 24 सालों से एक ही मनोकामना ज्योति कलश स्थापित किया जा रहा है।

मोतीतालाब बस्ती के मध्य चबूतरे पर छिंद का पेड़ था। इसके नीचे देवी का वास था। लोक मान्यता है कि यह देवी बस्ती की सुरक्षा करती थीं इसलिए वह छिंदवाली महाकाली कहलाती हैं। कालांतर में कच्चे चबूतरे पर जन सहयोग से बड़ा मंदिर बनाया गया है। 1998 में यहां देवी की प्रतिमा स्थापना की गई। तभी से (24 साल) यहां प्रतिवर्ष चैत्र तथा शारदीय नवरात्र में माता के भक्तों द्वारा सामूहिक रुप से एक ज्योति प्रज्वलित की जा रही है।

इसी क्रम में इस वर्ष शारदीय नवरात्र में 1151 भक्तों द्वारा भी एक अखंड जोत प्रज्वलित की गई है। प्रत्येक भक्त ने एक सौ 51 रुपये की सहयोग राशि प्रदान की है। मंदिर के संरक्षक एमआर निषादराज ने बताया कि माता का हर भक्त हजार डेढ़ हार रुपये जमाकर मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित नहीं करवा सकता इसलिए सामूहिक ज्योति कलश स्थापना की परंपरा मां छिंदवाली महाकाली मंदिर में पारंभ की गई है। इस व्यवस्था को खाद्य तेल की बर्बादी कम करने के साथ प्रदूषण नियंत्रण का भी तरीका भी माना जा रहा है।

पूरी हुई मनोकामना, घुटनों के बल दंतेश्वरी माता के दर्शन को निकला भक्त

नवरात्र में दंतेवाड़ा में जहां दो सौ किलोमीटर दूर तक से भक्त दर्शन करने पैदल पहुंचते हैं। वहीं कई भक्त घुटनों के बल भी मां का दर्शन करने पहुंच रहे है। दंतेवाड़ा के गीदम के हराम पारा के लच्छिन कश्यप पिछले वर्ष भी मां दंतेश्वरी देवी के दर्शन करने घुटनों के बल आया था। पिछले वर्ष उसने दंतेश्वरी देवी से पुत्र-प्रप्ति का वर मांगा था जो पूरा हो गया।

इसके बाद अब पंचमी में दंतेश्वरी देवी के दर्शन करने के लिए लच्छिन गीदम से 12 किलोमीटर दंतेवाड़ा की दूरी तय कर दंतेश्वरी माता के दर्शन करेगा। घुटनों के बल गीदम से आ रहे श्रद्धालु ने बताया कि परिवार में एक भी पुत्र नहीं है, मैने दंतेश्वरी माईजी से पुत्र की कामना की थी जो पूरी हो गई है। कोंडागांव, कोंटा, सुकमा, छिंदगढ़, कुकनार, जगदलपुर से बड़ी संख्या में हर वर्ष भक्त दर्शन के लिए पैदल पहुंचते हैं, लगातार दूसरे वर्ष प्रदेश अध्यक्ष मोहन मारकाम कोंडागांव से दंतेश्वरी देवी के दर्शन करने पैदल आ रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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