जगदलपुर। बस्तर के सपनों का कारखाना नगरनार स्टील प्लांट के निर्माण में शुरू से लेकर स्थापना तक प्रमुख भूमिका निभाने वाले अधिशासी निदेशक एवं परियोजना प्रभारी प्रशांत दास शनिवार को सेवानिवृत्त हो गए। 35 साल तक सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की स्टील उत्पादक कंपनियों में तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में काम कर उनके नाम पर कई उपलब्धियां जुड़ी हैं।

दास ने जून 2012 में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ज्वाइन किया और उनकी पहली पदस्थापना नगरनार स्टील प्लांट में महाप्रबंधक तकनीकी के पद पर हुई थी। उस समय स्टील प्लांट का निर्माण प्रारंभ नहीं हुआ था। उनकी पदस्थापना के एक साल बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और जनवरी 2016 में उन्हें पदोन्नात कर परियोजना प्रभारी बना दिया गया। उसी साल सितंबर में अधिशासी निदेशक बनने के बाद सेवानिवृत्ति तक वह इसी पद पर रहे। स्टील प्लांट का निर्माण प्रारंभ होने से लेकर कमीशनिंग की स्थिति तक प्लांट को पहुंचाने में उनकी सबसे प्रमुख भूमिका मानी गई है।

उन्होंने ऐसी स्थिति में भी प्लांट का निर्माण कार्य अवरूद्ध नहीं होने दिया जब इस प्रोजेक्ट में तकनीकी विशेषज्ञ, इंजीनियर और अन्य अधिकारी-कर्मचारियों (मानव संसाधन) की काफी कमी थी। श्रमिक संगठन संयुक्त इस्पात मजदूर संघ के अध्यक्ष संतराम सेठिया, सचिव महेंद्र जान ने दास की सेवानिवृत्ति पर कहा कि बस्तर में जब भी नगरनार स्टील प्लांट की स्थापना का उल्लेख आएगा स्थानीय जनता उनके योगदान को याद करेगी। कंपनी, शासन, प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, भू-प्रभावितों और श्रमिक संगठनों के साथ समय-समय पर चर्चा और समन्वय स्थापित कर प्लांट का निर्माण जारी रखने में उन्होंने प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया है।

35 साल की उम्र में मिला मेटालाजिस्ट आफ इंडिया अवार्ड

मूलतः ओडिशा के रहने वाले प्रशांत दास ने 1985 में एनआइटी राउरकेला से मेटालाजी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद इसी साल हिंदुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड सोनाबेड़ा में नौकरी शुरू की। 1988 में इस नौकरी से त्यागपत्र देकर स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) में नौकरी ज्वाइन की। उन्होंने राउरकेला स्टील प्लांट में लंबे समय तक काम किया।

1988 में उन्हें 35 साल की उम्र में केंद्र सरकार द्वारा मेटालाजिस्ट आफ द इयर के अवार्ड से सम्मानित किया गया। 21 साल सेल में काम करने के बाद 2007 में प्रशांत दास ने निजी कंपनी जेएसडब्ल्यू के तुरांगुलु कर्नाटक इकाई में स्टील प्लांट के क्षमता विस्तार की जिम्मेदारी संभाली और सफलतापूर्वक मिशन को पूरा किया। 2011 में नीलांचल इस्पात एनआइएनएल ज्वाइन कर काम किया और जून 2012 में वह नगरनार स्टील प्लांट में आ गए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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