Jagdalpur News : अनिल मिश्रा, जगदलपुर। इश्क वह बला है जिसमें दुनिया बदलने की ताकत है। बड़े बड़े बादशाहों ने प्रेम की खातिर तख्तो-ताज छोड़ दिया, फिर नक्सलवाद क्या चीज है। यहां लाल आतंक पर इश्क का नशा जमकर चढ़ने लगा है। प्रेम की खातिर लाखों के इनामी नक्सली हथियार डालकर वापस लौट रहे हैं। अभी दो दिन पहले ही एक प्रेमी जोड़ा जंगल से भागकर पुलिस की शरण में पहुंचा है। 27 अगस्त को दंतेवाड़ा जिले में प्रेमी जोड़े हरदेश लेकाम और आसमती ने समर्पण किया। बस्तर जिले के पीड़ियाकोट गांव के हरदेश लेकाम ने बताया कि विवाह के बाद आसमती गर्भवती हुई तो नक्सली नेताओं ने उसका गर्भपात कराने को कहा। ऐसे में हरदेश ने नक्सलवाद छोड़कर होने वाले बच्चे का भविष्य बनाने की ठानी।

18 अगस्त 2014 को पूर्वी बस्तर डिवीजन मिलिट्री कंपनी के कमांडर संपत उर्फ सुट्टे ने प्रेम की खातिर बंदूक को तिलांजलि दे दी। संपत को संगठन में रहते हुए आसमति से प्यार हो गया था। आसमती जंगल में नक्सलियों का इलाज करती थी। उन्हें जंगल से भागने का मौका तलाशने में करीब छह साल लग गए। योजनाथ माड़ा और आयते को संगठन में रहते हुए प्यार हुआ। दोनों ने चुपचाप भाग जाने का फैसला किया।

पहले मौका आयते को मिला। वह भागकर तोंगपाल पहुंची और अगस्त 2018 को थाने में सरेंडर कर दिया। छह महीने बाद माड़ा भी जंगल से निकल आया। सरेंडर करने के बाद माड़ा डीआरजी में भर्ती हो गया और दंतेवाड़ा पुलिस लाइन में रहने लगा। आयते तोंगपाल में ही थी। इन दोनों की अद्भुत प्रेम कथा तब सामने आई जब दंतेवाड़ा में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सामूहिक शादी में माड़ा ने आयते से शादी की। बीजापुर जिले के चेरकंटी गांव के गोपी मड़ियामी उर्फ मंगल ने इसी साल 20 मई को समर्पण किया था।

गंगालूर एरिया कमेटी में 15 साल तक काम करने के दौरान उससे महिला कमांडर भारती उर्फ रामे से प्यार हो गया। जगरगुंडा एरिया कमेटी के कमांडर बदरन्ना ने चिंतलनार दलम की लतक्का से विवाह किया और कोंटा में सरेंडर कर दिया। केशकाल डिवीजनल कमेटी के कमांडर केसन्ना ने सुनीता से शादी की और हिंसा से तौबा कर ली।

बासागुड़ा के डिप्टी कमांडर जोगन्ना ने चंद्रक्का से और मद्देड़ के डिप्टी कमांडर अशोकन्ना ने जयकन्ना से प्रेम में नक्सवाद का पाठ भुला दिया। दक्षिण बस्तर स्पेशल जोनल कमेटी के लछन्ना और मद्देड़ के एरिया कमांडर रामाराव ने भी प्रेम विवाह के बाद हिंसा को तिलांजलि दी। प्रेमी जोड़े बताते हैं कि जंगल में प्रेम सिर चढ़कर बोल रहा है। ऐसे सैकड़ों जोड़े हैं जो भागने के लिए मौका तलाश रहे हैं।

लव लेटर का कमाल

करीब छह महीने पहले दंतेवाड़ा पुलिस ने लव लेटर को नक्सलवाद के खिलाफ हथियार बनाकर बड़ी सफलता पाई। दंतेवाड़ा एसपी के मुताबिक नक्सली लक्ष्मण ने सरेंडर किया था पर उसकी प्रेमिका जयमति जंगल में ही रह गई थी। लक्ष्मण का खत किसी खास सूत्र के जरिए जयमति तक पहुंचाया गया। इसके बाद जयमति का जवाब आया कि वह निकलना तो चाहती है पर नक्सलियों ने उस पर पाबंदी लगा रखी है। उसने दिन व स्थान बताया जहां से पुलिस उसे ला सकती थी। पुलिस गई और जयमति को ले आई।

रिवर्स वसेक्टौमी करा रही पुलिस

नक्सल संगठन में बंदूक की शपथ लेकर विवाह होता है पर बच्चे पैदा न हों इसके लिए पुरूषों की नसबंदी करा दी जाती है। बस्तर आइजी सुंदरराज पी ने बताया कि पुलिस ने सरेंडर कर चुके कई नक्सलियों का रिवर्स वसेक्टौमी ऑपरेशन कराया है। अब उनके बच्चे हैं और अपने परिवारों के साथ वह खुश हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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