अनिल मिश्रा। Jagdalpur tourism news : जगदलपुर पर्यटन के लिहाज से बस्तर संभाग की चर्चा देश-दुनिया में होती है। यहां का प्राकृतिक परिवेश, विशालकाय झरने, जंगल आदि पर्यटकों के लिए आकर्षण के केेंद्र हैं। देश-विदेश के पर्यटक रायपुर या हैदराबाद की ओर से हवाई सेवा, ट्रेन, बस या कार के जरिए बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर पहुंचते हैं। इस खूबसूरत शहर में ठहरकर पर्यटक आसपास के दर्शनीय स्थलों को देखने जाते हैं। सुबह यात्रा पर निकलते हैं और शाम को होटलों में अपने कमरे में बंद हो जाते हैं।

कलेक्टर रजत बंसल ने अब जगदलपुर शहर को पर्यटन के केंद्र के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई है। उनकी योजना पर तेजी से काम भी चल रहा है। जगदलपुर शहर से करीब 40 किमी दूर अलग-अलग दिशाओं में दो जलप्रपात हैं। चित्रकोट को भारत का नियाग्रा कहा जाता है। दक्षिण की ओर स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में तीरथगढ़ जलप्रपात है। इन दोनों जगहों पर हर रोज पर्यटकों की भरमार रहती है।

कांगेर घाटी उद्यान में ही विश्वप्रसिद्ध कोटमसर की गुफाएं मौजूद हैं। चित्रकोट जाने वाले पर्यटक वहां नजदीक ही स्थित तामड़ाघूमर व चित्रधारा जलप्रपात को भी देखने जाते हैं। वहीं नारायणपाल का प्राचीन विष्णु मंदिर भी है। दंतेवाड़ा जिले में माई दंतेश्वरी का प्रचीन मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। दंतेेवाड़ा में ही पुरातत्व की नगरी बारसूर है जहां हजारों साल पुराने मंदिरों की श्रंखला है।

बारसूर के निकट इंद्रावती नदी का एक पर्यटन स्थल सातधार भी है। जगदलपुर शहर के आसपास भी कई प्राचीन मंदिर, झरने आदि हैं। वैसे तो संभाग में और भी कई दर्शनीय स्थल हैं पर तीन-चार दिनों में आमतौर पर पर्यटक इन्हीं स्थलों तक जाते हैं। दंतेवाड़ा व बस्तर जिले के पर्यटन स्थलों की दूरी इतनी ही है कि अगर योजना बनाकर सफर किया जाए तो कहीं भी जाकर शाम को लौटा जा सकता है। बस्तर जिला प्रशासन अब ऐसे पर्यटकों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें जगदलपुर दर्शन से जोड़ने की तैयारी में है।

शहर में बनेगा पर्यटन परिपथ

शहर के ह्दयस्थल में पुरातात्विक म्यूजियम, एतिहासिक राजमहल, सीरासार भवन, खबरगुड़ी, जयस्तंभ, गोलबाजार का वह पेड़ जहां क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया था, राजमहल के सामने चौपाटी, दलपत सागर आदि स्थल हैं। बस्तर दशहरा रथ के परिपथ को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। पर्यटकों को तो बस्तर दशहरा के विशाल रथ भी अभिभूत कर सकते हैं।

यह है योजना

सीरासार चौक पर पुरातत्व विभाग के म्युजियम को नया लुक दिया जा रहा है। इसकी दीवारों पर आदिवासी कला-संस्कृति से संबंधित मूर्तियां बनाई गई हैं। इस भवन की छत पर एक आलीशान रेस्टोरेंट भी बनाया जाएगा। पर्यटकों के लिए गाड़ी व गाइड का इंतजाम किया जाएगा। यह सुविधा सुबह व शाम को ही उपलब्ध होगी। बस्तर मेें बाहर से सालाना 50 हजार से ज्यादा पर्यटक आते हैं। बस्तर दशहरा व शीतकालीन अवकाश के दौरान शहर के 32 होटलों के करीब 700 कमरों में कहीं जगह नहीं मिल पाती।

बस्तर के कलेक्टर रजत बंसल ने कहा कि बस्तर दर्शन पर आने वाले लोगों को जगदलपुर शहर में भी पर्यटन की सुविधा मिले यह प्रयास किया जा रहा है। दलपतसागर तो है ही सुबह-शाम सीरासार चौक से गोलबाजार, मिताली, दंतेश्वरी मंदिर, राजमहल, सीरासार भवन, मंदिर आदि का दर्शन कराने के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

Posted By: Ravindra Thengdi

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