जगदलपुर। किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन के किरंदुल रेलखंड के कुम्हारसोडरा स्टेशन यार्ड में मंगलवार सुबह पेड़ गिरने से अप लाइन पर लगभग दो घंटे रेल आवागमन बंद रहा। विशाखापट्नम-किरंदुल नाइट एक्सप्रेस को एक घंटे नजदीकी सिलकझोडी स्टेशन में रोकना पड़ा। घटना सुबह 4.30 बजे हुई। बारिश के दौरान रेलमार्ग की किनारे पेड़ उखाड़कर पटरी पर गिर गया। पेड़ को काटकर पटरी से हटाने के बाद 6.50 बजे मार्ग बहाल हुआ।

भू-स्खलन से डेढ़ घंटे बाधित रहा केके रेललाइन

बतादें कि दो दिन पहले रविवार को किरंदुल-कोत्तावालसा रेल लाइन पर जगदलपुर से 84 किलोमीटर दूर पड़ोसी राज्य ओडिशा में लैंड स्लाइडिंग के कारण कोरापुट रेलखंड करीब डेढ़ घंटा रेल आवागमन बाधित हो गया था। इसके कारण भुवनेश्वर से जगदलपुर आ रही हीराखंड एक्सप्रेस को जरती स्टेशन में एक घंटा से अधिक समय तक रोकना पड़ा। मालगाड़ियां भी घटनास्थल के आसपास नजदीकी स्टेशनों में खड़ी रही। घटना सुबह 9.40 बजे मल्लीगुड़ा और जरती स्टेशन के बीच हुई। यहां रेलमार्ग के दोनों ओर अनंतगिरी घाट की ऊंची पहाड़ियां है।

पिछले दो दिनों से इस क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण पहाड़ से मिट्टी के बहकर पटरी पर जमा होने और चट्टानों के टूटकर पटरी पर गिरने की घटना की जानकारी रेलमार्ग पर गश्त कर रहे गैंगमेन ने दोनों स्टेशनों को दी। जिसके बाद रेल आवागमन रोक दिया गया। कोरापुट से श्रमिकों को बुलाकर पटरी से मलबा हटाने के बाद सुबह 11.15 बजे मार्ग बहाल होने पर रेलगाड़ियों का आवागमन दोबारा शुरू हुआ। मलबा गिरने की घटना के दो घंटा पहले राउरकेला-जगदलपुर एक्सप्रेस और तीन घंटा पहले जगदलपुर-हावड़ा एक्सप्रेस वहां गुजरी थी।

लगाई गई हैं लोहेे की जालियां

किरंदुल-कोत्तावालसा रेललाइन पर पहाड़ों से चट्टानें के टूटकर पटरी पर गिरने से रोकने के लिए रेलपटरी के दोनों ओर पहाड़ों में लोहे की जालियां लगाई गई हैं। मल्लीगुड़ा स्टेशन से लेकर कोरापुट और अरकू व एस्कोट सेक्शन में करीब डेढ़ सौ किलोमीटर क्षेत्र में जगह-जगह इस तरह का बंदोबस्त किया गया है। इसके बाद भी बारिश के दिनों में पटरी पर पहाड़ों से मलबा गिरने (भू-स्खलन) की संभावना बनी रहती है।

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