जगदलपुर। सार्वजनिक स्थल बस स्टेंड, रेलवे स्टेशन, मंदिर, धर्मशाला पार्क इत्यादि कोई भी जगह हो यहां किसी जमाने में सार्वजनिक उपयोग की चीजों विशेष कर कुओं का अपना खास महत्व होता था। पुराने समय में ऐसे सार्वजनिक स्थलों के सार्वजनिक कुओं के संरक्षण को लेकर शासन-प्रशासन आम लोग सभी सजग रहते थे। आधुनिक समय में भूगर्भीय जल के दोहन के नए प्रविधानों यथा बोर, हैंडपंप के कारण कुओं पर निर्भरता भले ही कम हुई है पर आज भी जहां इनकी सुविधा नहीं हैं वहां कुएं के जल से ही लोगों की प्यास बुझती है।

जगदलपुर शहर में स्थित पुराने प्रमुख मंदिर, बस स्टैंड, रेलवे, धर्मशाला, स्कूल आदि के परिसरों में कुएं जरूर मिलते हैं। इनमें हालांकि इक्का दुक्का कुओं का ही उपयोग हो रहा है। अधिकांश जगहों में कुएं या तो अपना अस्तित्व खो चुके हैं या फिर खोने की ओर बढ़ रहे हैं। इन कुओं का प्रदूषित जल भी किसी काम का नहीं रहा। संरक्षण के आभाव में वह दिन दूर नहीं जब शहर के प्राचीन कुओं की कहानी ही बची रह जाएगी। शहर के प्रमुख स्थल पुराना बस स्टेंड में आज भी पुराना कुआं मौजूद है। इसकी स्थिति भी अन्य कुओं से काफी बेहतर है।

कोतवाली थाना के सामने पुराना बस्तर स्टेंड में स्थित (नया बस स्टैंड मेटगुड़ा में बनने के बाद बसों का आवागमन वहीं से होता है) इस सार्वजनिक कुएं की किसी जमाने में कितनी अहमियत भी यह उस क्षेत्र लोग बताते नहीं थकते। 30-35 साल पहले पुराना बस स्टैंड में बसों का आवागमन होता था। तब इस कुएं में चालक परिचालक यात्रियों की यहां सुबह से देर शाम रात तक भीड़ लगी रहती थी। बसों की धुलाई भी इसी के जल से की जाती थी।

कोतवाली में पुलिस व पकड़े जाने वाले आरोपितों को पीने का पानी भी इसी कुएं से ले जाया जाता था। बस्तर और बस्तर के बाहर से बसों में सफर कर यहां आने वालों के कंठ की प्यास कुएं के जल से ही बुझती थी। तब पानी का कोई दूसरा स्त्रोत यहां नहीं था। पुराना बस स्टेंड क्षेत्र ने आज व्यवसायिक परिसर का रूप पा लिया है। यहां निगम ने बहुमंजिला भवन तानकर व्यवसायिक काम्प्लेक्स खड़ा किया है। ठीक इसके सामने यह प्राचीन कुआं मौजूद है।

कुएं को पाट नहीं सके

यहां स्थित पान चाय की दुकान के संचालक ने बताया कि 25 साल पहले निगम ने इस कुएं को पाटने की योजना बना ली थी लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के आगे ऐसा संभव नहीं हो पाया। यहां आसपास रहने वाले लोग कहते हैं कि यदि कुआं बोल सकता तो यह जरूर कहता, सार्वजनिक कुआं हूं मेरी ओर किसी ने आंख तरेरी तो अतीत याद दिला दूंगा। कुएं के जल को आसामाजिक तत्व कचरा डालकर प्रदूषित कर रहे हैं। इसके कारण यहां का पानी पीने लायक नहीं रह गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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